देश में एक बहुत ही अनोखा केस सामने आया है जिसमें गोवा की बारदेज तालुका के रहने वाले शैलेश मापारी पर सितंबर 2004 में उनके दोस्त  सागर की हत्याे का दोष सिद्ध हो गया था। इस मामले में शैलेश को उम्रकैद की सजा हो गई थी। 3 मार्च, 2021 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एके कौल और हेमंत गुप्ताम की पीठ ने शैलेश की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली स्पेमशल लीव पिटीशन को खारिज था।


इसी कड़ी में जानकारी के लिए बता दें कि वैसे तो उम्रकैद का मतलब होता है मौत तक जेल में बंद रहना लेकिन एक्जिक्यूदटिव अपने विवेक के अनुसार कैदी की जल्दीक रिहाई के आदेश दे सकता है। उम्र कैदियों के 14 साल जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई पर विचार करते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट शैलेश मापारी के केस में इस बात से हैरान था कि 16 साल के बाद भी किसी न रिहाई की याचिका दायर नहीं की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह एक सहायता है जो कि गोवा लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की ओर से ही होनी चाहिए और याचिकाकर्ता के मामले को विचार के लिए रखा जाए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख यानी 19 अप्रैल, 2021 से पहले निर्णय हमारे सामने रखा जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इस दौरान इसकी जानकारी नहीं थी कि कोलवाले सेंट्रल जेल में बंद मापारी की मौत 21 दिसंबर, 2020 को ही हो गई थी।