मेघालय विधानसभा चुनाव को लेकर 27 फरवरी को वोटिंग हो चुकी है। चुनाव परिणाम 3 मार्च को घोषित किए जाएंगे। इस दिन मेघालय के 372 उम्मीदवारों के किस्मत का फैसला हो जाएगा। मेघालय में चुनावी रण में कई दिग्गज नेता उतरे हैं। जिनमें से कई मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।


इस चुनाव में पार्टियों के साथ मुख्यमंत्रियों को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है। प्रदेश के राजनीति में हुए फेरबदल से मुख्यमंत्री की कमान पर भी असर पड़ सकता है।


बता दें कि 60 सदस्‍यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 30 सीटें हैं। साथ ही उसे राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो और 11 निर्दलीयों का समर्थन है। विपक्ष में मेघालय पीपल्‍स फ्रंट के 12, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 8, नेशनल पीपल्‍स पार्टी के दो और दो निर्दलीय विधायक हैं।


मुकुल संगमा प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं और इस बार वो दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। संगमा कांग्रेस की ओर से प्रमुख दावेदार हैं और अगर कांग्रेस एक फिर जीत हासिल करने में कामयाब होती है तो संगमा को प्रदेश की कमान मिल सकती है। मुकुल संगमा ने आरआईएमएस, इंफाल से मेडिसिन में ग्रेजुएशन की है।


इससे पहले 1993 में पहली बार संगमा ने मेघालय विधानसभा सदस्य का चुनाव जीता था और उसके बाद उन्हें मेघालय ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया। उसके बाद 1998, 2003, 2008, 2013 में फिर से उन्होंने जीत हासिल की। वो संसदीय सचिव भी रहे हैं। संगमा प्रदेश के मंत्री, उपमुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री रहे हैं जबकि दो बार से मुख्यमंत्री भी हैं।


पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) ने पहले ही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी ने पीएन सीएम को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। बता दें कि उन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी है। बताया जाता है कि संगमा का विरोध करने की वजह से उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था।


इस बार मुकुल संगमा की टक्कर कोनार्ड संगमा से बताई जा रही है। कोनार्ड संगमा ने तुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था जो उनके पिता पीए संगमा के निधन के बाद खाली हो गई थी। उन्होंने 2016 में इस सीट पर विजयी हुआ है। कोनार्ड संगमा एनपीपी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।