यदि आप एक बीच लवर हैं तो फिर तो आपका केरल आना जरुरी है। यहां आपको हर तरह के समुद्र तट मिलेंगे, जैसे रेतीले, नारियल, चट्टानी या प्रामन्टोरी। समुद्र के साफ नीले पानी के अलावा यहां आपको कई तरी के सीफूड व्यंजन भी मिलेंगे जो आपकी छुट्टियों को यादगार बना देंगे। केरल के समुद्र तट दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। 

समुद्र बीच

समुद्र बीच कोवलम में तीन प्रसिद्ध बीचों में से एक है। समुद्र बीच कोवलम के उत्तरी समुद्र तटीय किनारे पर स्थित है और दोनों बीचों की तरह यह पर्यटकों की भीड़ को आकर्षित नहीं करता है। यहां से लाइटहाउस बीच और हवा बीच पास में ही है। अगर आप यहां आएं तो तीनों बीच का मजा ले सकते हैं। इसकी मुख्य वजह दक्षिणी औए उत्तरी समुद्र तट पर बीचों की एक बड़ी रेंज की उपस्थिति है। पर्यटकों की भीड़ न होने की वजह से स्थानीय मछुआरे समुद्र तट के इस हिस्से पर मछली पकड़ना पसंद करते हैं। यदि आप इतने साहसी हैं कि बीच के इस ओर आने का जोख़िम उठा सकते है तो आपको सौम्य लहरों का चट्टानों के खिलाफ साहस देख कर खुशी होगी जो वापस आने तक कम होती चली जाएगी।

वर्कला बीच

वर्कला बीच, तिरूवंनतपुरम के उत्‍तर में 54 किमी. की दूरी पर स्थित है। पहली सदी के अंत के बाद से एक हिंदू परंपरा के तहत इस तट को प्रसिद्ध वावू बेली द्वारा बनाया गया था। यह समुद्र तट हिंदू भक्‍तों के लिए उतना ही महत्‍व रखता है जितना 2000 साल पुराना बना जर्नादन स्‍वामी मंदिर रखता है। इस समुद्र तट पर यात्रियों को लुभाने के लिए कई आकर्षक दृश्‍य हैं। इस तट पर नेचर सेंटर एक अन्‍य बड़ा पर्यटन केंद्र है। इसके अलावा, यहां औषधीय गुणों से भरे जल वाला झरना भी है जिसमें भ्रमण करने आए कई लोग पवित्र मानकर स्‍नान करते हैं।

हवा बीच

विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के मामले में केरल भी पीछे नहीं है। हवा बीच तट (Hawa Beach) विदेशी मेहमानों को खूब आकर्षित करता है। यह लाइटहाउस बीच (Light House Beach) और समुद्र बीच (Samudra Beach) के पास में ही है। पहले दो तट ही लोगों को खींचने में कामयाब हो पाते हैं, अंतिम तट जरा अछूता रह जाता है। हवा और लाइट हाउस तट दोनों अगल-बगल ही हैं, एक ओर विशाल समुद्र है जबकि दूसरी ओर होटलों एवं रेस्त्रों की कतार सी है। बड़े बड़े चट्टानों से टकराती हुई लहरों की ध्वनि आस-पास के सन्नाटे को चीरती है, साथ ही चट्टानों पर एक व्यू पॉइंट भी है जहां से असीम सागर का अवलोकन काफी अच्छे से किया जा सकता है। वैसे दिन के वक़्त यहां भीड़-भाड़ कम रहती है, किन्तु शाम होते ही चहलकदमी शुरू हो जाती है। यहां की शाम रंगीन होती है। जिसमें विदेशी सैलानी चार-चांद लगा देते हैं। जो यहां आकर्षण का केंद्र है। यहां पर आम या हिंदुस्तानी सैलानी कम ही जाते हैं, क्योंकि विदेशियों की संस्कृति और हमारी संस्कृति मेल नहीं खा​ती और अगर आप परिवार के साथ हैं तो आप उन्हे दूर से देखकर ही असहज महसूस करेंगे। यहां के बिलकुल तट पर स्थित रेस्त्रां में भोजन करना जरा महंगा है, लेकिन ऊपर बस स्टॉप की ओर जाने पर महंगाई से थोड़ी राहत जरूर मिलती है।

लाइट हाउस तट के बिलकुल अंतिम छोर पर एक लाइट हाउस ( एक प्रकार का टावर) स्थित है, जिसके नाम पर ही तट का नाम पड़ा।दूर से छोटा लगने वाला यह टावर नजदीक से काफी ऊंचा था। इस टावर पर चढ़ने के लिए काफी घुमावदार सीढियां चढ़नी पड़ी। ऊंचाई पर चढ़ते ही हवा के जोरदार झोंके ने पुरे शरीर के रोंगटे खड़े कर दिए। ऐसा लगा मानो हेलीकाप्टर से पुरे कोवलम के ऊपर उड़ रहे हों। इस पर चढ़कर अरब सागर का विशाल नजारा कही और पाना सचमुच दुर्लभ है।

लाइटहाउस बीच

लाइटहाउस बीच का नाम इस वजह से लाइटहाउस पड़ा क्योंकि इस बीच पर एक लाइट हाउस है। यह यहां का मुख्य बीच है इस पर विदेशियो की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। यह तिरूअनंतपुरम से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर है। कोवलम बीच इसके पास में ही है। इसलिए दोनों बीच को घूमने का प्लान एक साथ बना सकते हैं। बता दें कि इस बीच पर विदेशी पर्यटकों की भरमार रहती है। क्योंकि यह पहाडी पर बने प्राइवेट होटल का प्राइवेट बीच है। यहां पर आम या हिंदुस्तानी सैलानी नहीं जा सकते। क्योंकि  उनकी संस्कृति और हमारी संस्कृति मेल नहीं खा​ती और अगर आप परिवार के साथ हैं तो आप उन्हे दूर से देखकर ही असहज महसूस करेंगे। खासतौर पर जब आपके साथ बड़े उम्र के लोग हों और छोटे बच्चे। छोटे बच्चे उन्हे देखकर कुछ असहज सवाल कर सकते हैं जबकि बड़ों के होने के कारण आपको चोरी छुपे देखना पड़ सकता है। अगर आप केवल युगल या हमउम्र मित्रो के साथ हों तो कोई दिक्कत ना आपको होगी ना उन्हें। लाइट हाउस बीच दिन में 2 से 4 बजे के बीच ही खुलता है। 4 बजे के बाद यहां एंट्री नहीं होती है। इसलिए यहां जब भी जाएं, समय का ख्याल जरूर रखें।