निपाह वायरस के मामले अभी बहुत ही ज्यादा आ रहे हैं। यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने वाला एक जानलेवा संक्रमण है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि निपाह वायरस यह चमगादड़ों की लार और मल-मूत्र के जरिये फलों या जानवरों के रास्ते इंसानों के शरीर में प्रवेश करता है और फिर इंसान से दूसरे इंसान तक फैलता ही जाता है। यह कोरोना की तरह ही है क्योंकि कोरोना भी चमकादड़ से ही पैदा हुआ है ऐसा माना जाता है। निपाह वायरस इंसान पर ही नहीं जानवरों पर भी हमला कर रहा है।

संक्रमण का स्रोत
निपाह वायरस के संक्रमण का स्रोत है चमगादड़ों या पक्षियों के जूठे फल खाना, वायरस के शिकार मरीजों, जानवरों के संपर्क में आना। यही से निपाह जन्म लेता है और अपनी जड़े मजबूत करता जा रहा है। देश में केलर राज्य में इसने बहुत ही ज्यादा आतंक मचा रखा है।
लक्षण
खांसी, बुखार, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ, श्वास संक्रमण, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, सुस्ती, भ्रम की स्थिति, आंखों के सामने धुंधलापन छाना, दिमागी बुखार, इंसेफलाइटिस है।
जांच का तरीका
निपाह वायरस की पुष्टि के लिए अमूमन आरटी-पीसीआर और एलिसा जांच का सहारा लिया जाता है। कुछ मामलों में पीसीआर टेस्ट और वायरल आइसोलेशन पद्धति का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

बचाव के उपाय

  • समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें
  • कच्चे खजूर का रस या ताड़ी पीने से बचें
  • फल-सब्जी अच्छी तरह से धोने के बाद ही खाएं
  • पक्षियों के दांतों-चोंच के निशान वाले फल न खाएं
  • जानवरों, खासकर सुअर के संपर्क में आने से बचें
  • मास्क पहनें, हाथ मिलाने और गले लगने से परहेज करें