अभी का समय बहुत खराब चल रहा है। खासकर बीमारी और इलाज के नजरिये से। चारों ओर कोरोना की मार है, संक्रमण के साथ मौत की दर भी बढ़ रही है। लोगों के पास पैसा है तो हॉस्पिटल में बेड नहीं और सब सुविधाएं रहते हुए मरीजों की जान नहीं बच पा रही है। बीमारी इतनी भयावह है कि कोई इलाज काम नहीं आ रहा। इस बीमारी ने मेडिकल जगत के लिए एक नया ट्रेंड सेट कर दिया। इस बीमारी ने एक साथ वैक्सीन से लेकर ऑक्सीजन प्लांट और मास्क से लेकर सैनिटाइजर तक की अहमियत पर सोचने को मजबूर किया है। कोविड ने हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया और कई नई पॉलिसी बनाने का रास्ता इजाद किया।

कोविड ऐसी बीमारी है जिसमें साधारण इलाज से काम नहीं चलता। ऑक्सीजन, रेमडेसिविर, सीटी स्कैन और आईसीयू से ही इसमें मरीज की जान बचाई जा रही है। इसका खर्च इतना महंगा है कि साधारण इंसान बड़े अस्पतालों के बारे में सोच भी नहीं सकता। ऐसे में कुछ न कुछ तो इंतजाम करना ही होगा। इसके लिए सबसे अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को माना जा रहा है। आज बाजार में कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हैं जिन्हें खरीद कर, मामूली प्रीमियम चुका कर कोरोना के खिलाफ एक कवच प्राप्त कर सकते हैं। ये पॉलिसी लेते हैं तो इंश्योरेंस कंपनियां इलाज का पूरा खर्च उठाती हैं। कोरोना की भयावहता को देखते हुए सरकार ने इंश्योरेंस की पॉलिसी में कई बदलाव किए हैं।

नए नियम के मुताबिक, अब किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस में कोरोना का इलाज शामिल होगा। पहले से किसी ने कोई हेल्थ पॉलिसी ली है तो उसे कोरोना के इलाज की सुविधा उसी में प्राप्त होगी। पिछले साल कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही यह सुविधा शुरू हो गई थी। इस तरह की पॉलिसी को कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी कहते हैं। इस तरह की पॉलिसी में कोरोना के अलावा अन्य बीमारियां भी कवर होती हैं। नया इंश्योरेंस लेने पर भी कोरोना का इलाज उसमें कवर होगा। इसमें शर्त यह है कि मरीज को किसी अस्पताल में कम से कम 24 घंटे जरूर भर्ती होना पड़ेगा। तभी इलाज का खर्च मिलेगा। कंपनियां अब कोरोना के लिए भी खास पॉलिसी दे रही हैं।

जैसा कि नाम से साफ है कि यह पॉलिसी कोरोना के लिए ही खास तरह से बनाई गई है। इस पॉलिसी को 18 साल से 65 साल की उम्र का कोई व्यक्ति ले सकता है। इस पॉलिसी में पॉलिसी होल्डर के साथ उसका पूरा परिवार कवर होता है। इस पॉलिसी को शॉर्ट टर्म यानी कि कम अवधि के लिए भी बनाया गया है। 3.5 महीने से 9.5 महीने तक के लिए भी इस पॉलिसी को ले सकते हैं। यह पॉलिसी लेने के लिए आपको एक बार प्रीमियम चुकाना होगा। इस पॉलिसी का प्रीमियम 1200 रुपये से 3800 रुपये तक है। इसका लाभ उठाने के लिए मरीज को अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहना पड़ेगा।

कोरोना के खिलाफ सुरक्षा में यह दूसरी पॉलिसी है। इसे भी कोरोना कवच की तरह 18-65 साल की उम्र के लोग खरीद सकते हैं। इसमें पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति ही कवर होता है। इसमें परिवार का कवर नहीं है। इस पॉलिसी के तहत कोरोना पीड़ित को कंपनी की तरफ से 50 हजार से लेकर 2.50 लाख रुपये तक मिलता है। यह राशि पॉलिसी होल्डर के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। इसके बाद का खर्च इंश्योरेंस कंपनी नहीं उठाती। इसमें भी बस एक बार में ही प्रीमियम चुकाना होता है। इस पॉलिसी की अवधि 3.5 महीने से 9.5 महीने है। इसका प्रीमियम 250 रुपये से 2200 रुपये के बीच है जो पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करता है।

इस इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत बीमारी या दुर्घटना को कवर किया जाता है। इस पॉलिसी में इलाज से पहले और बाद में आने वाला खर्च कवर किजा जाता है। अगर पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति की उम्र 45 साल से कम है तो उसे मेडिकल चेकअप कराने की जरूरत नहीं है। इस पॉलिसी में 10 लाख तक का कवर मिलता है। पॉलिसी की खास बात यह है कि इसमें आयुर्वेद, होम्योपैथी का खर्च भी मिलता है। इस इंश्योरेंस में कई प्रकार के कवर शामिल होते हैं। जैसे मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का खर्च, मोतियाबिंद का ऑपरेशन, प्लास्टिक सर्जरी और दांतों के इलाज पर आने वाला खर्च भी कवर किया जाता है।

जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उनके लिए इंश्योरेंस कंपनियां कुछ खास नियम रखती हैं। कोरोना संक्रमित व्यक्ति के कुछ अंगों में दिक्कत आने की आशंका रहती है। जैसे फेफड़े, ह्रदय, किडनी में आगे चलकर कोई दिक्कत आ सकती है, इसलिए इन लोगों को ज्यादा प्रीमियम देना होता है। कंपनियों ने ऐसे लोगों के लिए 1 से 6 महीने का कूलिंग पीरियड तय किया है। यानी कि इस अवधि के बाद ही कोरोना से ठीक हुए लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकते हैं।