असम से आए दल ने बताया कि भारत का कोई ऐसा कोना नहीं है जहां किसी घर में असम की चाय की चुसकी लोग नहीं लेते हैं। भारतीय चाय संघ के अनुसार असम 69 करोड़ किलो चाय का उत्पादन करता जो भारत में 50 प्रतिशत उत्पादन है।


यहां बागानों में करीब 8 लाख मजदूर काम करते हैं जिनमें 57% महिलाएं हैं। विश्व में यहां की चाय की पत्ती को एक्सपोर्ट किया जाता है। यहां से आए सत्यजीत ने बताया कि असम में भारी संख्या में लोग चाय बगानों में काम करते हैं।


एशिया की सबसे पुरानी रिफाइनरी में एक डिग्बोई रिफाइनरी असम में है। यहां पुरुष और महिलाओं में समानता है। असम के हर नागरिक को अटल अमृत अभियान के तहत 2 लाख तक निशुल्क इलाज भी दिया जाता है। यहां चावल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।


मणिपुर: मैरीकॉम के मेडल से स्पोर्ट्स में आई क्रांति
मैरीकॉम के लंदन ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद मणिपुर में स्पोर्ट्स में क्रांति आई है। यहां के केएच अजमल शाह ने बताया कि बॉक्सिंग सहित मार्शल आर्ट, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग में लोगों की रुचि बढ़ रही है। स्पोर्ट्स कोटा से सशस्त्र बल, रेलवे में यहां के युवाओं का चयन काफी हो रहा है।


महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिला सशक्तिकरण आ रहा है। हस्तशिल्प में यहां की महिलाएं बांस के उत्पाद और मिट्टी के बर्तन बनाने के कामों से जुड़ी हैं।