भारत के नॉर्थ सेंटिनल द्वीप (North Sentinel Island) को सबसे खतरनाक माना जाता है। यहां जाने का मतलब है खुद की मौत को बुलावा देना। आज तक भारत ही नहीं विदेशी देश भी इस द्वीप पर रहने वाले लोगों का रहस्य नहीं जान पाए हैं। कहा जाता है कि इस द्वीप पर 60 हजार साल से आदिवासी रह रहे हैं, लेकिन वे क्या खाते हैं, उनकी भाषा क्या है और वे खुद को कैसे जीवत रख पाते हैं, इस बार में आज तक किसी को भी नहीं पता चल पाया है। 


माना जाता है कि यहां के आदिवासी बाहरी दुनिया के साथ कोई संपर्क नहीं रखना चाहते हैं। इसलिए जब भी कोई इतने द्वीप में घुसने की कोशिश करता है उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है। आपको बता दें कि साल 2004 में यहां बेहद खतरनाक सुनामी (2014 tsunami) आई थी। इसके बाद कोस्ट गार्ड के हेलिकॉप्टरों को सेंटिनल द्वीप भेजा गया, ताकि ये जाना जा सके कि यहां रहने वाले आदिवासियों की किस तरह मदद की जा सके। लेकिन जैसे ही हेलिकॉप्टर द्वीप पर पहुंचा, उस पर तीरों से हमला होने लगा। हमला इतना खतरनाक था कि हेलिकॉप्टर जमीन पर उतर नहीं पाया। साल 2006 में दो मछुआरे अपनी नाव समेत भटककर आइलैंड के करीब पहुंचे, तो जान से हाथ धो बैठे। साल 1981 में जब एक जहाज आइलैंड की रीफ के पास फंसा था, तो आदिवासी तीर-कमान, भाले लेकर जहाज के क्रू पर हमला करने लगे। तब किसी तरह उन लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से बचाया गया।

बता दें कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से इसकी दूरी महज 50 किलोमीटर है। इस वक्त इस आइलैंड (North Sentinel Island) की चर्चा भारत से लेकर अमेरिका तक में हुई थी, क्योंकि यहां के प्रतिबंधित जंगलों में पहुंचे एक अमरिकी टूरिस्ट जॉन एलन चाऊ (27) की वहां के आदिवासियों ने तीर मारकर हत्या कर दी है। यह टूरिस्ट इस आइलैंड के भीतर गया, यह जानते हुए भी कि इस द्वीप पर रहने वाले आदिवासियों से किसी भी तरह का संपर्क बनाना मना है।