यूक्रेन सीमा के पास रूस ने अपना सैन्य जमावड़ा एक सप्ताह में बढ़ा दिया है। उसने यूरोप से लगे यूक्रेन को चारों तरफ से घेर लिया है। जर्मनी की अपील के बाद भी रूस ने डोनबास के वोरोनेक और क्रासनोडर में तैनात की गई तोपों को पीछे नहीं किया है। इसके चलते यूरोप में हाई अलर्ट जैसे हालात हैं। उधर, अमेरिका ने भी काला सागर में अपने दो जंगी जहाज भेजने की तैयारी कर ली है।

खुफिया समूह द कंफ्लिक्ट इंटेलिजेंस के एक विश्लेषण के मुताबिक, क्षेत्र में साइबेरिया की तरफ से दूर से आने वाले सैन्य वाहनों के काफिले तेजी से बढ़े हैं। रूस ने पूर्वी डोनबास के वोरोनेक और क्रासनोडर में हजारों सैनिक टैंक और मिसाइलें तैनात कर दी हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रूसी समर्थकों वाले डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र में भी रूस ने विद्रोह भड़काने की तैयारी कर रखी है। सैटेलाइट व सोशल मीडिया में आई तस्वीरें बताती हैं कि पूरे विवादित इलाके में रूस ने यूक्रेन को घेर लिया है। 

यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने शुक्रवार शाम को सीमाई क्षेत्रों का दौरा भी किया। उधर, रूसी संसद के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि पूर्वी यूक्रेन में हालात ‘बेहद अस्थिर’ हैं। उन्होंने चेताया, क्षेत्र में यूक्रेन को लेकर जिस तरह की कार्रवाई चल रही है उससे ‘युद्ध’ का खतरा बढ़ रहा है। 

पूर्वी यूरोप के जिस विवादित क्षेत्र (डोनबास) में रूस ने सेना तैनात की है वहां 2014 से रूसी समर्थक अलगाववादियों का कब्जा है। रूस इसका लाभ उठाकर क्षेत्र में सैन्य घेराबंदी कर रहा है। यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका ने इस घेराबंदी पर चिंता जताई है। जर्मनी ने कहा है कि वह रूस के खिलाफ नाटो देशों की हर कार्रवाई का समर्थन करेगा।

अमेरिका ने अपने जंगी जहाज बोसफोरस के रास्ते भेजने के लिए तुर्की से अनुमति मांगी है। तुर्की ने पुष्टि की है कि अमेरिका के जहाज 14 और 15 अप्रैल को इस समुद्री रास्ते से गुजरेंगे। क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों के आने के बाद यहां तनाव और बढ़ने की आशंका है। इस बीच, यूक्रेन ने भी नाटो में शामिल होने की कोशिशें बढ़ा दी हैं। अमेरिका इसके समर्थन में है जबकि रूस भड़क रहा है।