सुप्रीम कोर्ट  ने बुधवार को केंद्र सरकार को आदेश जारी किया है कि वह अब कोविड-19 वैक्सीन की खरीद के संबंध में विस्तृत विवरण मुहैया कराए।  अदालत ने केंद्र से कोवैक्सिन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी तीनों की वैक्सीन के बारे में जानकारी मांगी है।  

सुप्रीम कोर्ट ने जो विवरण मांगा है उसमें तीनों की 1) वैक्सीन की खरीद की तारीख, 2) हर तारीख में खरीदी गई वैक्सीन की संख्या और 3) वैक्सीन की सप्लाई की संभावित तारीख की जानकारी मांगी है। 

शीर्ष अदालत ने केंद्र से ये भी पूछा है कि वह 1, 2 और 3 चरण में शेष आबादी का टीकाकरण कैसे और कब करेगी, अदालत ने इसका भी पूरा विवरण मांगा है।  इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी जानकारी मांगी है कि वह म्यूकरमाइकोसिस की दवा की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वह क्या कदम उठा रही है।  

देश में कोविड-19 से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा दायर एक स्वत: संज्ञान मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट की खंडपीठ द्वारा यह फैसला जारी किया है। 

विशेष पीठ ने कहा, केंद्र सरकार अपना हलफनामा दाखिल करते समय यह भी सुनिश्चित करेगी कि टीकाकरण नीति पर उसकी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज तथा फाइल नोटिंग की प्रतियां टीकाकरण नीति के साथ संलग्न हों। 

सुप्रीम कोर्ट ने 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण पर केंद्र की नीति को मनमाना और तर्कहीन बताते हुए कहा कि वर्तमान में उस आयु वर्ग के लोग न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु सहित संक्रमण के गंभीर प्रभावों से पीडि़त हो रहे हैं। 

अदालत ने महामारी की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डाला और कहा कि इसने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां इस कम आयु वर्ग को भी टीकाकरण की आवश्यकता है।  हालांकि, अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक आधार पर विभिन्न आयु समूहों के बीच प्राथमिकता को बरकरार रखा जा सकता है। 

अदालत ने अपने आदेश में कहा, इसलिए, 18-44 आयु वर्ग में व्यक्तियों के टीकाकरण के महत्व के कारण, पहले दो चरणों में केंद्र सरकार की खुद टीकाकरण कराने नीति और इसे बदलकर राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों द्वारा या 18-44 वर्ष के बीच के व्यक्तियों के लिए निजी अस्पताल में भुगतान कर टीकाकरण प्रथम दृष्टया, मनमानी और तर्कहीन है। 

सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई को विभिन्न राज्यों द्वारा कोरोना वायरस रोधी टीकों की खरीद के लिए वैश्विक निविदाएं जारी करने के बीच केंद्र से पूछा था कि उसकी टीका-प्राप्त करने की नीति क्या है।  इसके साथ ही उसने टीकाकरण से पहले कोविन ऐप पर अनिवार्य रूप से पंजीयन करवाने की जरूरत पर भी सवाल उठाए और कहा कि नीति निर्माताओं को जमीनी हकीकत से वाकिफ होना चाहिए तथा डिजिटल इंडिया की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।