मेघालय के पूर्वी जैतिया पहाड़ी जिले में एक खान में जलस्तर शुक्रवार को कुछ इंच घटा लेकिन 13 दिसंबर से उसके अंदर फंसे दर्जन भर से अधिक लोगों के बचे होने की आस बिलकुल क्षीण हो गई है । इस खान में नौवें दिन भी बचाव प्रयास जारी रहे। मुख्यमंत्री कॉनराड  संगमा ने कहा कि यह एक बड़ी चुनौती है और समय हाथ से निकलता जा रहा है । 

समीप की  लितेन नदी में जलस्तर बढ़ने से 370 फुट गहरी इस अवैध कोयला बन में शुरु में  पानी बढ़ा  था । लितेन नदी से पानी इस खान में भर जाने के बाद 13 दिसंबर से खनिक उसके अंदर ही फंस गए । फिलहाल उच्च क्षमता के दो पंपों से इस खान से पानी निकला जा रहा है । मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें और पंपों की जरुरत है । 

इस विषय का मूल यही है खनिकों को जिंदा निकालने के लिए समय हाथ से निकलता जा रहा है । उन्होंने कहा कि उच्च क्षमता वाले करीब 200 पंप खान से पानी निकालने के लिए चाहिए । उन्होंने खान में फंसे लोगों के प्रति चिंता प्रकट करते हुए कहा कि स्थानीय लोग यह कह रहे हैं और बचाव कार्य का यही पैमाना है क्योंकि समय निकलता जा रहा है । 

पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक एस नोन्टिंगर ने बताया कि पंप क जरिए पानी बाहर निकालने से  पानी का स्तर कम होने की उम्मीद है । बचाव प्रयास व्यर्थ रहे हैं  क्योंकि इस खान में 13 दिसंबर से जलस्तर घटा ही नहीं है । राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और राज्य पुलिस के 300 से अधिक कर्मी  वहां डेरा डाले हुए हैं । 

एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि अगर बचाव अभियान बिना किसी नतीजे के लंबा चला तो खनिकों की जान को बहुत ज्यादा खतरा हो सकता है । उन्होंने कहा कि हमें बताया गया है कि उन्होंने कुछ खाया पिया नहीं है । हर एक लम्हा कीमती है और अधिकरियों को जल्द से जल्द इस समस्या से निपटना होगा । इससे पहले खनन मामलों के जानकार और पुरस्कार विजेता बचावकर्मी जसवंत सिंह गिल ने बृहस्पतिवार को घटनास्थल का दौरा कर राज्य सरकार को बचाव अभियान में कोल इंडिया से मदद मांगने का सुझाव दिया था ।