इस साल का पहला सूर्य ग्रहण आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रविवार को लगेगा। यह कंकणाकृति सूर्यग्रहण भारत सहित कई देशों में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र और मिथुन राशि पर पड़ रहा है। इस कारण मिथुन राशि वालों को यह ग्रहण विशेष कष्टदायक होगा। इसके चलते इस नक्षत्र व राशि में जन्में जातकों को ग्रहण के दर्शन करना अशुभ रहेगा। वही प्रशासन के लिए भी ग्रहण शुभ नहीं है, क्योंकि सूर्य प्रशासन का प्रतिनिधि माना जाता है। कंकणाकृति यह वलयकार सूर्य ग्रहण होगा और इस दौरान कंकणाकृति में वलयकार नजर आएगा। आकाश में एकदम अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। आसमान में तारे टिमटिमाते नजर आएंगे। कुछ क्षणों के लिए दिन में रात नजर आएगी। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण का शुभ-अशुभ प्रभाव तीन से छह माह तक रहता है।

ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब -जब सूर्य एवं चंद्र ग्रहण पड़ हैं तो उनका दीर्घकालीन प्रभाव विर्सग राजनीति पर भी पड़ता है। सूर्य ग्रहण रविवार को मिथुन राशि में लगेगा। सूर्यग्रहण का रविवार को पड़ना ही शुभ नहीं है। ग्रहण के समय 6 ग्रह बुध शुक्र गुरु शनि राहु और केतु वक्री रहेंगे। वहीं मिथुन राशि में चार ग्रह सूर्य बुध राहु चंद्र की युति बन रही जो कि शुभ फल देने वाली नहीं है। वक्री ग्रहों के कारण भारत को भी आर्थिक संकट के साथ अनेक समस्याओं को लेकर संघर्ष करना पड़ेगा। देश में आर्थिक संकट गहरा होगा युद्ध जैसी स्थिति बनेगी। प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप बाढ़ तूफान इत्यादि से जनजीवन प्रभावित रहेगा। इसके अलावा सूखा पड़ने, राजनीतिक उथल-पुथल, आम जनता में असंतोष फैलने की भी संभावनाएं भी बनेगी।

यह करें उपाय

ग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युजंय मंत्र, सूर्य मंत्र का जाप करें। सूर्य नमस्कार, आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ, गुरु मंत्र का जाप करने के साथ भजन-कीर्तन करना चाहिए। ग्रहण के बाद यथा शक्ति दान करना चाहिए खास कर अनाज व काले तिलों का दान करें। इस दिन वर्जित कार्य नहीं करने चाहिए।

भारत सहित इतने देशों में दिखाई देगा

चूड़ामणि खंडग्रास सूर्य ग्रहण भारत सहित कई देशों में दिखाई देगा यह पूर्व यूरोप, मध्य अफ्रीका, उत्तरी एवं दक्षिणी अमरिका, दक्षिणी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, चीन, ताइवान, अरब क्षेत्रों में, ओमान, पाकिस्तान आदि क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा।

12 घंटे पहले लग जाएगा ग्रहण का सूतक

सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले से लग जाएगा। सूतक शनिवार रात्रि 10 बजे से शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण के मोक्ष तक रहेगा। जयपुर में ग्रहण पर्वकाल इस प्रकार रहेगा। स्पर्श सुबह 10 बजकर 15 मिनट से शुरू हो जाएगा। मध्य 11 बजकर 56 मिनट व ग्रहण मोक्ष शुद्धि दोपहर एक बजकर 44 मिनट पर होगी। ग्रहण दिखाई देने व ग्रहण शुद्धि का समय अलग अलग स्थानों पर अलग अलग होगा। 

राशि के अनुसार ये करें दान

ज्योतिषाचार्या सुरभि गुप्ता के अनुसार ग्रहण का राशियों पर भी गहरा शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ता है। यह ग्रहण मिथुन राशि में घटित हो रहा है इसके कारण मिथुन राशि वालों के लिए तो कष्टदायी रहेगा। इसके अलावा वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ व मीन राशि वालों के लिए अशुभकारी रहेगा। जबकि मेष, मकर कन्या व सिंह राशि वालों के लिए शुभफल देने वाला होगा। यदि जातक अपनी राशि के अनुसार दान करें तो इसके अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है।

मेष- सात तरह के अनाज मिलाकर दान करें।

वृषभ- सफेद मिठाई दान करें।

मिथुन- साबूत मूंग की दाल दान करें।

कर्क- पक्षियों को दाना डाले।

सिंह- गुड़ का दान करें।

कन्या- कपड़े दान करें।

तुला- चावल का दान करें।

वृश्चिक- मसूर की दाल दान करनी चाहिए

धनु- गुड़ व पीले वस्त्र दान करें।

मकर- सरसो का तेल दान करना चाहिए

कुंभ- उड़द की दाल दान करनी चाहिए

मीन- गुड़ का दान करें।

पिछली बार 1933 में हुआ था, अगली बार 2034 में होगा

ज्योतिषाचार्य पं अक्षय शास्त्री ने बताया कि 21 जून का दिन इस साल बहुत दुर्लभ और अनूठा है। एक तो इस दिन साल का सबसे बड़ा दिन होता है और इसी के साथ इस खास दिन पर वलयाकार सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस तरह का ग्रहण पिछली बार 21 अगस्त 1933 को लगा था। अब यह 21 जुन को लग रहा है और इसके बाद अब अगला 14 साल बाद यानी 21 मई 2034 में देखने को मिलेगा। यह वलयाकार ग्रहण दुनिया के कई क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।