अगर आप पर्सनल लोने लेने जा रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर। पर्सनल लोन पर रिपेमेंट के समय तय ब्‍याज नहीं देना होगा बल्कि आपके पर्सनल लोन की हर EMI के बाद आपके लोन पर इफेक्टिव इंटरेस्‍ट रेट यानी ब्‍याज घटता जाएगा। इससे आपको ब्‍याज के मोर्चे पर हजारों रुपए का फायदा हो सकता है। ब्‍याज के मोर्चे पर आपको कितना फायदा होगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप कितना पर्सनल लोन लेते हैं।

 

बकाया लोन पर कैलकुलेट होगा इंटरेस्‍ट
 
भारतीय स्‍टेट बैंक के मुताबिक हम पर्सनल लोन का इंटरेस्‍ट रेट डेली / मंथली रिडयूशिंक बैंलेंस मेंथेडेलॉजी से कैलकुलेट करते हैं। यानी आपके पर्सनल लोन पर इंटरेस्‍ट बचे हुए लोन अमाउंट पर कैलकुलेट किया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि आपकी हर ईएमआई या रिपेमेंट के साथ ब्‍याज कम होता जाता है। इस तरह से आपके पर्सनल लोन पर इफेक्टिव इंटरेस्‍ट बहुत कम हो जाता है।

एेसे होता है आपको नुकसान 
 
एसबीआई के अनुसार एनुअल रिड्यूशिंग बैलेंस मेथेड में साल की शुरुआत में आपके बकाया पर्सनल लोन पर इंटरेस्‍ट कैलकुलेट किया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि आने वाले एक साल में आप जो ईएमआई या रिपेमेंट कर देते हैं आपको उस पर भी इंटरेस्‍ट का भुगतान करना होता है। इस तरीके से आपका इफेक्टिव ब्‍याज एक साल के बाद ही कम होता है।

 
लोन लेने से पहले बैंक से पूछे ये सवाल
 
अगर आप पर्सनल लोन लेने से पहले बैंक से इंटरेस्‍ट रेट कितना है इसके अलावा यह सवाल भी पूछें कि आप इंटरेस्‍ट रेट कैसे तय करेंगे। डेली मंथली रिड्यूशिंग बैंलेंस मेथड से या एनुअल रिड्यूशिंग बैलेंस से। अगर बैंक डेली मंथली रिड्यूशिंग बैलेंस मेथड पर इंटरेस्‍ट कैलकुलेट करता है तभी आपको उस बैंक से पर्सनल लोन लेना चाहिए। इससे आपको पर्सनल लोन पर इफेक्टिव इंटरेस्‍ट बहुत कम पड़ेगा। अगर आपने एनुअल रिड्यूशिंग बैलेंस मेथड वाले बैंक से पर्सनल लोन लिया तो आपको ब्‍याज के मोर्चे पर नुकसान होगा।

एेसे तय होता है पर्सनल लोन का इंटरेस्‍ट रेट
 
आम तौर पर बैंक सालाना 10 फीसदी से 18 फीसदी तक इंटरेस्‍ट रेट पर पर्सनल लोन देते हैं। पर्सनल लोन का इंटरेस्‍ट रेट आपकी इनकम प्रोफाइल के आधार पर तय होता है। अप किस कंपनी में नौकरी करते हैं। आपकी सैलरी कितनी है। इसके अलावा अगर आपका सैलरी अकाउंट उस बैंक मं है जहां से आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं तो बैंक आपको कम इंटरेस्‍ट रेट पर पर्सनल लोन दे सकता है।