असम के विश्वनाथ जिले के शौकत अली, जिसको बीफ रखने के मामले में भीड़ द्वारा पीटा गया था वो राज्य में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान नहीं कर पाया। अस्पताल में भर्ती होने के कारण शौकत अली वोट नहीं दे पाया। अली के बेटे अब्दुल वहाब ने बताया कि अली का नाम कोलाकाती एलपी स्कूल में लिस्टेड था। आपको बता दें कि असम की पांच सीटों के लिए गुरुवार को मतदान हुआ था।


यह घटना 7 अप्रैल 2019 को हुई थी, जिसने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप में दिखाया गया था कि जब वह अपने घर के रास्ते में था तो विश्वनाथ जिले के चाराली साप्ताहिक बाजार में अली को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर घायल कर दिया। इकट्ठा हुई भीड़ ने राष्ट्रीय नागरिकता की मांग करते हुए उससे पूछा की क्या वह एक बांग्लादेशी है अगर है तो एनआरसी सर्टिफेकट दे। इसके बाद अली को उप-विभागीय सिविल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, बाद में फिर गुवाहाटी मेडिलकल कॉलेज ने शिफ्ट कर दिया गया। जहां अली को पुलिस प्रोटेक्शन दी गई।
अब्दुल ने कहा कि उसके पिता मतदान नहीं कर पाए। इसी के साथ कहा कि जीएमसीएच में जहां उनका इलाज चल रहा है वहां कड़ी सुरक्षा में कोई कुछ बोल नहीं सकता है। उनसे बात करने की किसी को भी अनुमती नहीं हैं। वाहब ने कहा कि पिता शरीर पर कई जहगों और सिर पर चोट लगी, लेकिन अब उनकी स्थिति ठीक है। गुरुवार को हॉस्पिटल में सीटी स्कैन और अल्ट्रा सांउड टेस्ट करने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि रिपोर्टस आने के बाद उनको डिस्चार्ज किया जा सकता है। अली के भाई के मुताबिक एक समूह में 10 से 12 व्यक्ति अली को चारों तरफ घेर लिया और मधुपुर में उसके साथ मारपीट की। अली ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मेरे पिता और बड़े भाई के बाद मैंने ये होटल संभाला, लेकिन इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई। बता दें कि असम में गाय क मांस पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन एक पशु चिकित्सक के मुताबिक 14 साल की गाय को मारने की अनुमति है। अली ने कहा कि मैं 40 साल से ये व्यापार कर रहा हूं, लोगों ने मुझे नमाज पढ़ने और होटल में गोमांस बेचने के लिए रोका गया और पोर्क (सुआर का मांस) खाने के लिए जबरन मजबूर किया गया।
जमात-ए-इस्लामी पूर्वोत्तर क्षेत्र ने गुरुवार को अली के परिवार के लिए अच्छे उपचार, सुरक्षा और मुआवजे की मांग की। जमात के सचिव सोफिकुल इस्लाम ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि अज़ान फकीर और ज़ेंबसीब की भूमि में। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर निर्दोष लोगों पर की गई अनोखी क्रूरता को रिकॉर्ड करने और पोस्ट करने के लिए एक अमानवीय और आपराधिक प्रवृत्ति पर ध्यान केंद्रित करने वाली घटना है। सोफिकुल ने कहा कि शौकत अली दशकों से अपने कारोबार कर रहा है। यदि किसी को इसके काम से शिकायत की थी तो यह मामला अधिकारियों को बताया जाना चाहिए था। ऐसा करने के बजाए अपराधियों ने अली पर हमला किया और उसे सूअर के मांस का सेवन करने के लिए मजबूर किया। जमात के अध्यक्ष अब्दुल बासित ने कहा कि पूर्वोत्तर के 80 प्रतिशत लोग गोमांस का सेवन करते हैं और इस तरह की असहिष्णुता अभूतपूर्व थी।बता दें कि अखिल असम गोरिया-मोरिया युबा चतरा परिषद ने भी इस घटना की निंदा की और घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस घटना के बाद ऑल असम अल्पसंख्यक विद्यार्थी (एएमएस) संगठन ने 9 अप्रैल 2019 को असम के सीएम सर्वानंद सोनोवाल को एक पत्र लिखा जिसमें शीघ्र इस घटना पर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाही और अदालत जांच की मांग की। इस घटना से जुड़े मुख्य अपराधी सहित अभी तक पांच लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। जानकारी दे दें कि असम में चुनाव पहले चरण में पांच सीटों लखीमपुर, जोरहाट, डिब्रुगढ़, तेजपुर और कलियाबोर में संपन्न हुए। यहां  कुल 14 लोकसभा सीटें हैं, विश्वानाथ तेजपुर की लोकसभा सीट के अंडर आता है।