सुपरनोवा विस्फोट से ब्रह्माण्ड के कई रहस्य खुल जाते हैं। इसी तरह से वैज्ञानिक सुपरनोवा होने का बहुत बेसब्री से इंतजार करते हैं और बारिकी से शोध करते हैं। विशालकाय तारों की मौत होने को सुपरनोवा कहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ब्रह्माण्ड में कभी कभी होने वाली घटना नहीं हैं बल्कि ऐसे होने पर पड़ोस का यह तारा सूज जाएगा। यह एक ऐसा मौका होता है जो एक खगोलविद के लिए बहुत सारी जानकारी देने वाला साबित हो सकता है।

वैज्ञानिक शुरू से तारों के विकास चक्र में सुपरनोवा को अहम पड़ाव के तौर पर देखते रहे हैं। बहुत सारे तारे बाइनरी सिस्टम या द्विज तारों में पाए जाते हैं जिसमें दो तारे एक दूसरे के नजदीक रहकर एक दूसरे का चक्कर लगाते हैं। सी लिए वैज्ञानिक भी इसीलिए अध्ययन के नजरिए से बाइनरी तारों की खोज में रहते हैं। पिछले कुछ दशकों में वे इस तरह के द्विज तारे खोजने में सफल भी हुए हैं और उनमें से कुछ असामान्य रूप से कम तापमान वाले तारे भी है।


जब कोई तारा विस्फोटित होता है तो उस विस्फोट के अवशेष तेजी से अपने साथी तारे में जा टकराते हैं। आमतौर पर इनमें पूरे तारे को नुकसान पहुंचाने की ताकत नहीं होती है। लेकिन इससे दूसरे तारे की सतह गर्म जरूर हो जाती है। जिससे तारा सूज जाता है। यह बिलकुल वैसे ही होता है जैसे जलने पर हमारी त्वचा फूल जाती है। यह फफोला तारे से 10 से 100 गुना ज्यादा बड़ा हो सकता है।