आरक्षण उचित प्रतिनिधित्व का मामला है जो कि जायज हैं पर ये कहा तक सही हैं कि आरक्षित गरीब लोगों के बच्चे के बराबरी करें ?जबकि आज प्राइवेट स्कूलों, और कॉचिंगो में पढ़ाई करने वाले बच्चों को वो लोग 30 लाख में डॉक्टर 15लाख में इंजीनियर बना सकते हैं और अच्छे प्राइवेट कॉलेजो में एजुकेशन दिला सकते हैं तो सरकारी कॉलेजों IIT, मेडिकल, वैज्ञानिक इंस्टिट्यूटो , सिर्फ गरीबों केटेगरी के अनुसार ही आरक्षण मिले , जबकि इसका फायदा 3-3 ;4-4 पीढ़ियों से  कुछ परिवार ही ले रहे है ,ऐसा क्यो?

आज समाज को जरूरी है जो सम्पन्नशाली हो चुके हैं उनको अपने से पीछे रह गये लोगों को ऊपर लाना है जिससे कि समाज का विकास होगा शिक्षा का स्तर बढ़ेगा अंधविश्वास कुरुतियों का नाश होगा हम एक सशक्त रूप से आगे बढ़ेंगे , आज हमारे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है ,पर पाने के लिए बहुत कुछ है।  उसके लिए सर्वप्रथम हमको शिक्षा ही लेनी होगी । शिक्षा से हम हमारा विकास कर पाएंगे और हम आगे की ओर उन्मुख हो पाएंगे विभिन्न कुरूतियों का नाश करते हुए हमारे समाज को हम आर्थिक रूप से समृद्धशाली बनाएंगे , हमारे बच्चों को हम अच्छे शैक्षणिक वातावरण तैयार करते हुए अच्छे संसाधनों के साथ व्यवसाय के साथ उनको समुचित व्यवस्थाएं देंगे, परंतु बीते 75 सालों में कुछ ही परिवारों ने विकास किया है वही अपना विकास करते जा रहे हैं चाहे किसी भी जगह का उदाहरण ले सकते हैं किसी भी गांव का ले सकते हैं, जो भी थोड़ा अमृतवाण हुआ उसने अपने परिवार को अपने समाज से अलग कर लिया हैं। 

संपन्न लोगों का एक अलग ही वर्ग बन गया है जो कभी गरीबों, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों को भी ऊपर आने दे ? वह सिर्फ अपनी संतान को ही आगे देखना चाहता है और वह बार-बार क्रीमी लेयर जैसी व्यवस्था का विरोध करता आ रहा है , शक्तिशाली और संपन्न लोगों का  राजनीतिक रूप से एक अलग ही वर्ग (एलीट ग्रुप) बन चुका है जो हमारे समाज में हो रहे अत्याचारों का भी विरोध नहीं दर्ज करवाते , जिससे कि अन्य लोगों का हमारे समाज के प्रति नजरिया भी नहीं बदल पाया है जबकि हमारे समाज के बहुत सारे लोग संपन्न भी हैं प्रतिभाशाली भी हैं नेता संपन्न भी है परंतु कोई भी अत्याचार होता है तो कभी भी वह साथ नहीं देते चाहे कहीं बहुत सारे उदाहरण आप ले सकते हो मेरा नाम लेना उचित नहीं होगा क्या वहां कोई नेता क्या कोई अधिकारी उसमें आगे आया नहीं उनको सिर्फ अपने बच्चों को आरपीएससी यूपीएससी के एग्जाम में बच्चों को पास करवाना होता है , उनको समाज से कोई लेना-देना नहीं है और अपने बच्चों का भी या तो वह अन्य जाति व्यवस्था में चले जाते हैं या अपने ही बराबर वर्ग में ही देखते हैं गरीब के लिए उनके लिए कोई जगह नहीं होती ।

 बाबा साहब ने जब आरक्षण के स्वरूप की रचना की थी उस वक्त हमारा समाज बहुत ही  गरीब वंचित अभावग्रस्त था , उस वक्त हमारे समाज का कहीं भी प्रतिनिधित्व नहीं था उनकी आवाज नीचे से ऊपर तक उठाने वाला कोई नहीं था उस वक्त उस आवाज को बाबा साहब ने उठाया और हम को संवैधानिक प्रदत आरक्षण दिलवाया जिससे हम विधानसभाओं में संसद में राज्यसभा में आईएस, आरएएस सभी यूपीएससी, आरपीएससी की सर्विस में आरक्षण का प्रावधान मिला जिसके कारण हमारे समाज का विकास हुआ । परंतु 1956 में बाबा साहब को कहना पड़ा --: "मुझे पढ़े लिखे समाज ने धोखा दिया है"  क्योंकि पढ़ा-लिखा समाज बाबा साहब के साथ में उस वक्त नहीं था सिर्फ अपने स्वार्थ में पूंजी जुटाने में लग गया अनपढ़ वर्ग उस टाइम भी बाबा साहब के साथ था , आज भी साथ है भीम …, भीम , कई वर्ग के नाम से आज हैं।

आज समय की क्रांतिकारी व्यवस्थाओं को देखते हुए प्रतियोगिता परीक्षाओं को देखते हुए शैक्षणिक प्रतियोगिताओं को देखते हुए आरक्षण का प्रारूप बिल्कुल बदल चुका है । आज 16% जो आरक्षण दिया गया है उसमें सिर्फ प्रतिष्ठित जॉब्स 500000 परिवार ही बार-बार आरक्षण का लाभ ले रहे हैं जो कि प्रगतिशील समाज के संपन्न लोग हैं इसीलिए गरीब वर्ग कर्मचारी वर्ग के बच्चों पर शैक्षणिक सुविधाएं इतनी नहीं जुटा पाते  हैं जितना संपन्न साली वर्ग अपने बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षाओं में संपन्न वर्ग से कंपटीशन नहीं कर पाते हैं और परसेंटेज लगातार लेवल उच्चतम पर जाने के कारण गरीब एवं मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों के बच्चे रह जाते हैं। 

इन सब के फलस्वरूप बेरोजगारी के आलम में और मजदूर का बेटा मजदूर नेता का बेटा नेता अधिकारी का बेटा अधिकारी डॉक्टर का बेटा डॉक्टर इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बन रहे हैं पिछले 20 वर्ष का रिकॉर्ड देखें तो शैक्षणिक सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है , परंतु जो का नाश हुआ है हिंदी मीडियम, इंग्लिश मीडियम , गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए कमरे का किराया से लेकर रखना चाहे तो वह है नहीं कर सकता क्योंकि उसके पास इतनी अर्थ नीति नहीं है। 

वह अपना पेट पाल सकता है परंतु आज 75 वर्ष पूरे हो गए परंतु फिर भी ना ही तहसील हेडक्वार्टर पर ,नहीं जिला लेवल पर  ,राजधानी लेवल पर इतने सारे हॉस्टल शैक्षणिक केंद्र नहीं हुए हैं जहां गरीबों के बच्चों को फ्री खाना ,फ्री पढ़ना, अच्छी स्कूल ,अच्छी कोचिंग सेंटर की सुविधाएं मिलती है । सिर्फ दिखावे के लिए हाथी के दांत वाले जिनका भी प्रोफाइल फोटोग्राफी बहुत अधिक होती है वह होता है वह सारे संस्थाओं के द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह भी होता है क्योंकि उनको एक समाज में अपना वोट बैंक बनाना होता है । जिसके कारण लगातार संपन्न लोग हम जैसे गरीबों का शोषण कर रहे हैं शोषण करते रहेंगे ऐसे समाज का विकास कभी नहीं हो सकता इसीलिए सभी प्रबुद्ध वर्ग बुद्धिशाली वर्ग से विनती है कि आज हमको आवाज उठाने की जरूरत है । 

क्या आप बता सकते हैं कि क्रिमीलेयर लागू होने पर किसको नुकसान होगा और किसको फायदेमंद साबित होगा ,पर ये जरूर है कि समाज को इसका फायदा जरूरी से होगा  , कर्मचारियों, गरीबों, किसानों, मजदूरों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, वो भी आगे मुख्य धारा में आएंगे , समाज का विकास होगा , समाजिक एकता बढ़ेगी ,अमीर गरीब की ओर आकर्षित होगा ।

क्रीमी लेयर की और अग्रसर होना पड़ेगा नहीं तो आने वाले समय में मजदूर मजदूर ही रहेगा, गरीब कर्ज में होगा, अमीर और अमीर होगा जातियों सिर्फ देखवा होगी सिर्फ़ गरीब के लिये , अमीर के लिये कोई जाति धर्म नही होगा  और उस गरीब पर तन ढकने का कपड़ा तक नहीं ले पाएगा हम किस तरफ जाना चाहते है , इसलिए जागो और अपने अधिकार के लिए लड़ना ही होगा , हमको हमारी आवाज निडर बनना होगा अपने आप अपने हक की आवाज उठानी होगी ।

लेखक : राकेश कुमार वर्मा 

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