असम गैस कंपनी लिमिटेड का चेयरमैन नहीं बनाए जाने से पार्टी और विधायकी छोड़ने की घोषणा करने वाले तेरस ग्वाला की नाराजगी एक दिन बीतते ही फुर्र हो गई।

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से बीती रात डिब्रूगढ़ स्थित निवास में आधे घंटे की मुलाकात के बाद ग्वाला मान गए कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा और उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए।

बीते मंगलवार की शाम मुख्यमंत्री ने राज्य में निगम- निकायों के लिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की सूची पर अपनी स्वीकृति दे दी थी। नामों की घोषणा और उनमें अपनी नाम नहीं पाने के बीद विधायक ग्वाला ने खुलकर मीडिया के सामने नाराजगी जता दी। कहा कि स्थानीय विधायक की अनदेखी कर दूसरे विधानसभा क्षेत्र के विधायक को असम गैस कंपनी लि. की अध्यक्ष बना दिया गया है इसलिए वे विधायक पद और पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।

ग्वाला के इस्तीफे की घोषणा के बाद भाजपा राज्य अध्यक्ष रंजीत दास ने मीडिया में आई इस खबर पर हैरानी जताई थी। उन्होंने कहा था कि नियमानुसार विधायकी से इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को दिया जाना चाहिए या फिर मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष को इसकी जानकारी दी जाती, पर वैसा नहीं किया गया। इसलिए वे इस पर ग्वाला से बात हुए बिना कुछ टिप्पणी नहीं कर सकते।

भाजपा विधायक ग्वाला के इस्तीफे की खबर से विपक्ष को सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ एक मसाला मिला गया था, लेकिन उसकी यह खुशी एक दिन भी नहीं टिक सकी। ग्वाला ने खुद मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री से आधे घंटे की बात के बाद वे संतुष्ट हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से खुलकर अपनी सारी पीड़ा जता दी है।

मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया है कि आगे से किसी भी क्षेत्र में होने वाले किसी भी काम में स्थानीय विधायक की राय के बिना कुछ नहीं होगा। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से विधायक ग्वाला की नाराजगी दूर करने वाले मंत्र का खुलासा नहीं हुआ।