असम आैर बंगाल के र्इट भठ्ठा मजदूरों को बंधक बनाकर जिले में काम कराने के मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच कार्रवार्इ शुरू हो गर्इ है। बता दें कि इस मामले में हाई कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के जांच के लिए एसडीएम एसजेड हसन के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है। वहीं दूसरी ओर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम जांच के लिए असम रवाना हो गई है। वहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन की टीम मामले की समीक्षा कर डीएम के सामने पेश करेगी।

जांच में मामला सही होने पर ईंट भठ्ठा मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती हैं। चिमनी भठ्ठे पर इसका असर पड़ सकता है। इस बीच बुधवार को पूछताछ के लिए गए सभी 26 मजदूरों को मुक्त कर दिया गया है। प्रशासन को मौजूदा समय में भठ्ठे पर बंगाल और असम के मजदूर नहीं मिले। ऐसी स्थिति में अधिकारियों की टीम को मामले की जांच के लिए असम भेजा गया है।


बता दें कि असम के मालेगांव के रहने वाले मुहम्मद अयूब अली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में उसने कहा था कि बंगाल और असम के मजदूरों को ईंट भट्ठा मालिक ने बंधक बना रखा है। जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मधेपुरा के डीएम को इस मामले में तुरंत कार्रवाई का आदेश जारी किया। जहां डीएम मुहम्मद सौहेल ने उदाकिशुनगंज के एसडीएम एसजेड हसन और एसडीपीओ अरूण दूबे के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए टीम गठित की।

टीम में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी को भी शामिल किया गया है। टीम में शामिल अधिकारियों ने बुधवार को उदाकिशुनगंज के नयानगर पंचायत के नवटोल गांव के रूपेश झा के ईंट भठ्ठा पर पहुंच कर 26 मजदूरों को पूछताछ के लिए थाना में लाया गया था। पूछताछ में इन मजदूरों ने प्रशासन को बताया कि उन्हें काम के लिए मजदूरी मिलती है।