चीन (China) की कम्युनिस्ट सरकार ने गलवान वैली (Galwan Valley clash)  में भारतीय सैनिकों के साथ हुई झड़प में घायल अपने एक सैनिक को ओलिंपिक टॉर्च बेयरर (olympic torch bearer) बनाया है। चीन के इस कदम के विरोध में बीजिंग में 4 फरवरी से शुरू हो रहे विंटर ओलिंपिक गेम्स (winter olympic games) की ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी में कोई भारतीय अधिकारी शामिल नहीं होगा।  भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए गेम्स का डिप्लोमैटिक बायकॉट करने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चीन खेल में राजनीति को ला रहा है।

उल्लेखनीय है कि चीन ने बुधवार को खेलों की मशाल रिले (Beijing 2022 Winter Olympics torchbearer) के मशालधारक के रूप में की फाबाओ (Qi Fabao) को उतारा जो देश की सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी के रेजीमेंट (People Liberation Army) के कमांडर हैं। यह वही कमांडर हैं, जो जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley clash) में भारतीय सैनिकों के साथ झड़प में घायल हो गए थे।

वहीं दूसरी तरफ एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। दरअसल पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) की गलवान घाटी (Galwan Valley) में जून 2020 में चीन और भारत की सेनाओं के बीच हिंसक भिड़ंत (clash between the armies of China and India) के करीब डेढ़ साल बाद एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 'बहुत बड़ा' खामियाजा भुगतना पड़ा था। यह रिपोर्ट खोजी ऑस्ट्रेलियाई अखबार द क्लैक्सन (investigative Australian newspaper The Klaxon) में प्रकाशित की गई है। एंथनी क्लान की विशेष रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि घाटी में गलवान नदी पार करते समय बहुत सारे चीनी सैनिक (China army) पानी में डूब गए थे। जो कि चीन की ओर से जारी किए गए आंकड़े की तुलना में बहुत अधिक है। रिपोर्ट में मरे गए चीनी सैनिकों की संख्या 38 बताई गई है।