एक दौर में दिल्‍ली भाजपा के कद्दावर नेता रहे असम के राज्‍यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी एनआरसी के मुद्दे पर अचानक सक्रिय हो गए हैं। राज्‍यपाल पद पर रहते हुए उन्‍होंने इस मुद्दे पर लगातार दूसरे दिन राजभवन से बयान जारी किया है। अपने बयान में उन्‍होंने एनआरसी ड्राफ्ट को मूल असमिया लोगों के भरोसे को जिंदा रखने वाला मसौदा करार दिया है। बुधवार को उन्‍होंने कहा था कि यह देश के लिए एक ऐतिहासिक दस्‍तावेज है।

उन्‍होंने कहा कि भारतीय नागरिकता के लिहाज से यह ड्राफ्ट एक ऐतिहासिक घटना भी है। ऐसा इसलिए कि यह असमिया और असम समझौते की इच्छाओं के अनुरूप तैयार किया गया है। यह असमिया लोगों लोगों के भरोसे का प्रतीक है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद से बहुत से लोग एनआरसी में नाम न होने से चिंतित हैं। मैं, उन्हें आश्वासन देता हूं कि जो भी मूल भारतीय नागरिक हैं उनका निश्चित रूप से अंतिम एनआरसी रिपोर्ट में नाम होगा।

राज्‍यपाल मुखी ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्य या देश में रहने वाले विदेशियों के बारे में जानने का पूरा अधिकार है। यह बेहतर होगा कि यह प्रत्येक राज्य में तैयार हो। राज्‍य सरकारों न केवल एनआरसी का मसौदा तैयार करना चाहिए बल्कि उन्हें हर जनगणना के साथ इसे अपडेट भी करना चाहिए। इससे देश में सभी नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना संभव हो पाएगा। फिर सरकार की पहली प्राथमिकता भी देश के नागरिकों के सुरक्षा की होनी चाहिए न कि विदेशियों की। उन्‍होंने कहा कि देश के सभी नागरिकों को सरकार आश्वस्त करती है कि प्रत्येक भारतीय का नाम अंतिम एनआरसी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा और राज्य में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा की गारंटी सरकार की होगी।

आपको बता दें कि असम में तीन दिन पहले एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद से देश में सियासी रजानीति तेज हो गई है। कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के नेता एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। फिलहाल शीर्ष अदालत की संवैधानिक पीठ ने केंद्र से कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं उनके खिलाफ सरकार फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगी। न ही उन्‍हें अभी बांग्‍लादेशी करार दे सकते हैं। ऐसा इसलिए कि एनआरसी अभी केवल ड्राफ्ट है। जब तक शीर्ष अदालत इस पर अंतिम फैसला नहीं सुना देती तब तक सरकार उन्‍हें केवल अवैध मान सकती है।