नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में वायुसेना के अड्डे पर ड्रोन हमले में दो ड्रोन्स का इस्तेमाल हुआ था।  घटना के चश्मदीदों ने इस बात की पुष्टि की है।  इसके साथ ही इस हमले की जांच में शामिल एजेंसियों का शक पाकिस्तान पर गहरा गया है।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी से चश्मदीदों ने कहा कि हमलावरों ने दो ड्रोन का इस्तेमाल किया। 

ड्रोन्स भारत-पाकिस्तान सीमा की दिशा में पश्चिम की ओर बढ़ रहे थे। उधर फॉरेंसिक एनालिसिस के अनुसार हमले में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक आरडीएक्स था।  जांच से जुड़े एक सैन्य अधिकारी ने कहा, विस्फोटक एक सामान्य उपकरण लगता है, लेकिन जमीन के संपर्क में आते ही तेज उसका असर तेज दिखा। 

दूसरी ओर भले ही अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ड्रोन कहां से उड़े या कहां वापस लौट गए जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि पिछली कई मामलों के जांच से यह संकेत मिले कि हथियार गिराने के लिए इसी तरह के ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार से किया गया।  पिछले हफ्ते पुलिस ने कश्मीर में शोपियां के पास से नदीम और तालिब-उर-रहमान को गिरफ्तार किया था।  दोनों पर आरोप है कि दोनों लोग 5 किलोग्राम विस्फोटक उपकरण लगाने की साजिश रच रहे थे।  दोनों बनिहाल टनल के पास पकड़े गए थे। 

पुलिस अधिकारी ने कहा कि उस मामले की जांच से पता चला है कि नदीम और तालिब के पास से बरामद विस्फोटक ड्रोन के जरिए सीमा पार से लाया गया था।  बनिहाल की साजिश का पता रॉ द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के आधार पर लगाया गया था।  पहले ड्रोन ऑपरेशन में शामिल लश्कर-ए-तैयबा इकाई की निगरानी कर रहा था। अधिकारी ने कहा, यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि इस हमले में वह यूनिट शामिल थी या नहीं, यह अभी जांच का विषय है। 

पिछले महीने जम्मू के सीमा क्षेत्र में कम से कम 30 ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली है।  हालांकि हाल के कुछ मामले गलत साबित हुए हैं। हाई अलर्ट पर मौजूद जवानों ने धरती के करीब घूम रहे सैटेलाइट्स को या प्लैनेट्स को ड्रोन समझने की गलती कर दी।  हालांकि इस बात के सबूत हैं कि कुछ मामलों में ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक गिराए गए।