गुवाहाटी । राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) अद्यतन प्रक्रिया को लेकर उच्चतम न्यायालय  द्वारा मंगलवार को सुनाए गए फैसले का असम विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने स्वागत किया है । उच्चतम न्यायालय ने अपने इस फैसले में गांव पंचायत के दस्तावेजों को एनआरसी के वेध अतिरिक्त दस्तावेज की संज्ञा देने के साथ ही सभी विवादित दस्तावेजों की पुन: जांच करने को कहा है । 

श्री सइकिया ने कहा कि उच्चतमन्यायालय के इस फैसले ने केंद्र व राज्य सरकार को दोहरी नीति क्रो जनता के सामने ला दिया है । कांग्रेसी  नेता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने गांव पंचायत के दस्तावेजों को एनआरसी के वैध अतिरिक्त दस्तावेज करार देकर असम की 29 लाख विवाहित महिलाओं के सम्मान को बढाने और उनके भविष्य को  सुरक्षित करने का काम किया है ।

उन्होंने कहा कि विवाहित महिलाओं  से जुडे इन्हें दो मुद्दों पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री ने चुपी साध रखी थी । उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार जानबूझकर इस बात से अंजान बनी हुईं थी कि पंचायत के प्रमाण पत्र पिता के घर से पति के घर गई महिला के लिए संयोगसूत्र का काम करेंगे, वंशक्रम  का नहीं । 

उन्होंने न्यायालय  द्वारा कहीं गई बात कि यहां के मूल निवासियों का एनआरसी से  कोई संबंध नहीं है, का भी स्वागत किया है । उन्होंने आशा जताई है कि अदालत के इस फैसले के बाद आम लोगों की शंकाओं का समाधान हो जाएगा ।