पावर कट (power cut) के चलते लोग परेशान हो रहे हैं. इसका सबसे ज्‍यादा असर कारोबारियों पर हो रहा है. पिछले कुछ दिनों से लगातार पावर कट ने उनका धंधा पटरी से उतार दिया है. बिजली कटौती के चलते यूनिट ज्यादातर वक्त बंद रहती है और उनके कारीगर खाली बैठे रहते हैं. लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक क्या हुआ है? बिजली का उत्पादन घटा है या इसकी कोई और वजह है.

आपको बता दें कि बिजली कटौती की वजह ये नहीं है कि पावर प्रोडक्शन कम हो रहा है बल्कि, इसकी वजह ऐसी है जिसका आपको अंदाजा भी नहीं होगा. दरअसल, आप तक बिजली पहुंचाने वाली कंपनियों या डिस्कॉम पर बिजली पैदा करने वाली कंपनियों का बकाया आसमान पर पहुंच चुका है. पावर प्रोड्यूसर्स मांग कर रहे हैं कि डिस्कॉम्स पहले बकाया को चुकाएं और तभी उन्हें बिजली मिलेगी.

बस यहीं से लोगों की भी मुसीबत शुरू हो जाती है, लेकिन, उधारी के जिस जाल में डिस्कॉम्स फंसे हुए हैं उससे देश के दूसरे हिस्सों में भी लोगों को पावर कट का सामना करना पड़ सकता है.

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) पर 14 दिसंबर तक बिजली पैदा करने वाली कंपनियों जिन्हें जेनरेटर कंपनियां या जेनकॉस भी बोलते हैं, उनका कुल बकाया बढ़कर 98,682 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है. अगर इसमें विवादित रकम भी शामिल कर ली जाए तो ये रकम बढ़कर 1.09 लाख करोड़ रुपये बैठती है. इन डिस्कॉम्स के सामने नई मुश्किल ये है कि सरकार भी इनकी मदद करने से अब हाथ पीछे खींचती दिखाई दे रही है.

बात इतनी भर नहीं है, सरकार ऐसे नियमों को लाने पर भी काम कर रही है जिनके तहत बिजली पैदा करने वाली कंपनियों के बकाये पर डिफॉल्ट करने वाले डिस्कॉम्स को दूसरे जरियों से बिजली लेने की इजाजत नहीं होगी. यानी डिफॉल्ट कर चुके डिस्कॉम्स ऑल्टरनेटिव सोर्स से बिजली नहीं ले पाएंगे.

इसका मतलब ये है कि अगर बिजली पैदा करने वाली कंपनियां डिस्कॉम्स को पैसे चुकाए बगैर और बिजली देने से इनकार कर देती हैं तो उन्हें कहीं और से पावर नहीं मिलेगी. अब डिस्कॉम्स के पास ही बिजली नहीं होगी तो आम लोगों के घरों में भी बिजली नहीं पहुंचेगी.

यही नहीं, बिजली से चलने वाले तमाम काम-धंधे भी बुरी तरह से प्रभावित होंगे. यानी आने वाले दिनों में हो सकता है कि आपको लंबे पावर कट्स का सामना करना पड़े.