नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 एक राष्ट्रीय नीति है। पड़ोसी राष्ट्रों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हुए हिंदू, पारसी, जैन, सिख, बौद्ध और ईसाई धर्म के भारत आने के इच्छुक लोगों का बोझ पूरा देश लेगा। इस विधेयक को लेकर असम में गलत प्रचार कर रहे दल-संगठनों की वजह से प्रदेश काफी पीछे चला जाएगा। यह कहना है मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल का। यहां ब्रह्मपुत्र अतिथिशाला में असम साहित्य सभा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में नागरिकता विधेयक-2019 सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक के पास होने से राज्य में विदेशियों के आने संबंधी प्रचार में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने विधेयक व असम समझौते की धारा 6 को लागू करने की पहल के बारे में आम नागरिकों को जागरुक करने पर बल दिया।

सोनोवाल ने राज्य के स्थानीय तथा मूल निवासियों की भाषा-संस्कृति के प्रति चुनौती पैदा करने वाले किसी भी शक्ति के साथ समझौता नहीं करने की बात दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों के हित सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार पूरी दृढ़ता के साथ कार्य करेगी। सोनोवाल ने कहा कि उनकी सरकार स्थानीय मूल निवासियों की सरकार है और इसलिए भूमिहीन स्थानीय परिवारों को जमीन का पट्टा देने की व्यवस्था की गई है। 

राज्य के छह समुदायों को जनजाति का हित विघ्नित होने की आशंका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा अनुसूचित जनजाति को मिल रहे आरक्षण की व्यवस्था में कोई अड़चन न हो इसके लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी। बैठक में असम भाषा विधेयक, सरकारी पत्राचार में असमिया भाषा के फाॅन्ट का सूचीकरण इत्यादि विषयों पर भी चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ह्रषीकेश गोस्वामी, असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डा. परमानंद राजवंशी, बोड़ो साहित्य सभा के अध्यक्ष कमला मुसाहारी आदि उपस्थित थे।