जीएसटी चोरी के एक के बाद एक मामले का खुलासा हो रहा है। केंद्रीय जीएसटी ने गुरुवार को फर्जी फर्म बनाकर और फर्जी इनवाइस जारी करके 33.5 करोड़ रुपए की कर चोरी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया। इस मामले को यहां अब तक की सबसे बड़ी कर चोरी बताया जा रहा है।

केंद्रीय माल एवं सेवाकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, आगरा के आयुक्त कार्यालय की तरफ से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम ऋषभ मित्तल, वरुण गुप्ता, विकास अग्रवाल और सुनील कुमार राठौर हैं। विज्ञप्ति के मुताबिक विभागीय जांच में पता चला है कि चारों आरोपियों ने पिछले तीन साल के दौरान अलग-अलग नामों और पतों पर करीब 100 फर्मों का गठन किया। इन फर्मों के बीच करीब 184.56 करोड़ के फर्जी इनवाइस जारी किए गए। इस तरह उन्होंने कथित रूप से करीब 33.5 करोड़ की कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया। पकड़े गए आरोपियों से केंद्रीय जीएसटी की पूछताछ जारी है। केंद्रीय जीएसटी आयुक्त ललन कुमार के निर्देशन में एक विशेष दल ने इस कार्यवाही को अंजाम दिया।

इससे पहले GST के खुफिया प्रभाग के अधिकारियों ने दिल्ली के एक कारोबारी को कथित तौर पर फर्जी तरीके से 128 करोड़ रुपए के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हस्तांतरित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। DGGI की चंडीगढ़ परिक्षेत्र यूनिट के अधिकारियों ने जांच में पाया कि आरोपी कथित तौर पर सामान की खरीद-फरोख्त के बिना ही बिल जारी कर रहा था और इस तरह अवैध तरीके से दिल्ली एवं चंडीगढ़ सहित कई जगहों पर विभिन्न इकाइयों को आईटीसी का दावा करने में मदद कर रहा था।

सरकारी खजाने को जीएसटी चोरी से हर साल सैकड़ों करोड़ का नुकसान होता है। कोरोना काल में जब सरकार की माली हालत खराब है, उसे उम्मीद है कि जीएसटी की मदद से खजाने में मोटी रकम आएगी। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 2.46 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष (2020-21) की इसी अवधि के दौरान 1.17 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कलेक्शन हुआ था।

जून तिमाही में नेट इन-डायरेक्ट टैक्स (GST और Non-GST)कलेक्शन 3.11 लाख करोड़ रुपए था। तिमाही के दौरान नेट GST कलेक्शन 1.67 लाख करोड़ रुपए से अधिक था, जो पूरे 2021-22 वित्तीय वर्ष के लिए 6.30 लाख करोड़ रुपए के बजट अनुमान का 26.6 फीसदी है। नेट जीएसटी कलेक्शन में सेंट्रल जीएसटी, इंटिग्रेटेड जीएसटी और मुआवजा उपकर शामिल हैं।