आज तालिबान अपनी सरकार का ऐलान कर वाला है। कई प्रांतों पर कब्जा करने वाला तालिबान अफगानिस्तान पर अपना राज चलाने वाला है। लोकतंत्र को खत्म कर अब शरिया कानून लागू करने वाला है। अभी तक अफगानिस्तान में सरकार का गठन नहीं हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक भी तालिबान पंजशीर घाटी पर कब्जा नहीं जमा पाया है। इस घाटी के कवायदों के बीच आज तालिबान अफगानिस्तान में अपनी नई सरकार का ऐलान कर सकता है।


कयास लगाए जा रहे हैं कि तालिबान के सह-संस्थापक मुल्लाह अब्दुल गनी बरादर अफगान की नई सरकार के मुखिया होंगे। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार में संगठन के सह-संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब और शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई को वरिष्ठ पद मिल सकता है। इसके अलावा तालिबान के मुखिया हैबातुल्लाह अखुंदजादा को संरक्षक या सुप्रीम लीडर जैसा कोई पद मिल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि मुल्ला बरादर तालिबान के कतर स्थित राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख रह चुके हैं।

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने बताया कि " अफगानिस्तान में नई सरकार के गठन को एक दिन के लिए टाल दिया गया है "। सरकार के गठन से संबंधी घोषणा कल की जानी थी लेकिन किसी कारणवश नहीं किया गया और आज सरकार का ऐलान किया जाएगा। तालिबानी मुजाहिद ने कहा कि " नई सरकार के गठन की घोषणा आज की जाएगी। काबुल में ईरानी नेतृत्व की तर्ज पर सरकार गठन का ऐलान करने के लिए तैयार है जिसमें समूह के शीर्ष धार्मिक नेता मुल्ला हेबतुल्लाह अखुनजादा अफगानिस्तान में सर्वोच्च प्राधिकारी होंगे "।


तालिबान के सूचना एवं सांस्कृतिक आयोग में वरिष्ठ अधिकारी मुफ्ती इनामुल्लाह समांगनी ने कहा कि " नई सरकार पर सलाह-मशविरा करीब-करीब पूरा हो चुका है और कैबिनेट को लेकर भी जरूरी चर्चा कर ली गई है। ईरान में, सर्वोच्च नेता देश का सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक प्राधिकारी है। उसका दर्जा राष्ट्रपति से ऊंचा होता है और वह सेना, सरकार और न्यायपालिका के प्रमुखों की नियुक्ति करता है "। बता दें कि तालिबान के सभी नेता काबुल पहुंच चुके हैं।