त्रिपुरा की सीमा से सटे मिजोरम गांव में एक ब्रू महिला (33) की मौत से उत्तर त्रिपुरा के छह शिविरों में बसे ब्रू शरणार्थियों और मिजो जनजातियों के बीच पिछले तीन दिनों से सांप्रदायिक तनाव व्याप्त है और शरणार्थियों काे उनके पैतृक स्थान पर भेजने का काम भी रूक गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंचनपुर में आशापारा शरणार्थी शिविर में शरण ली हुई महिलाओं ने पिछले सात अक्टूबर को मिजोरम में वापस जाने के इच्छुक शरणार्थियों को लेने के लिए 20 बसों के साथ आए मिजोरम के अधिकारियों को काले झंडे दिखाए और ब्रू के लिए अलग जिला स्वायत्त परिषद (एडीसी) के गठन सहित अपनी पुरानी मांगों को उठाया।

प्रदर्शनकारियों ने काफी देर तक मिजोरम के अधिकारियों को घेराव किये रखा। बाद में, पुलिस ने अधिकारियों को बचाया और उन्हें खाली वाहनों के साथ वापस भेज दिया। ब्रू परिवारों ने आरोप लगाया कि लिंडा रिआंग (33) ने लगभग दो साल पहले पश्चिमी मिजोरम के ममित जिले के थिंगहलुन गांव के वनलालबेला से शादी की थी। आरोप है कि महिला के पति ने नस्लीय आधार पर उसे दो महीने तक यातना दी, जिससे उसकी मौत हो गयी।

आशापारा शिविर की ब्रू शरणार्थी लाजमात्राइ रियांग ने आरोप लगाया, पिछले पांच अक्टूबर को उसके पति वनलालबेला ने लिंडा को आग लगा दी और वह जिंदा जल गई थी। दंपति को नस्लीय मुद्दे को छोड़कर कोई समस्या नहीं थी। अल्पसंख्यक और मिजो विरोधी ठहराए जाने के बाद उसे कई अवसरों पर प्रताड़ित किया गया था। केवल उसके पति ने ही नहीं, मिजो ग्रामीणों ने भी ब्रू होने के लिए सार्वजनिक रूप से उसके साथ बुरा व्यवहार किया था।

ब्रू शरणार्थियों ने यह भी शिकायत की कि स्थानीय पुलिस ने भी इसे दुर्घटना के रूप में मामला दर्ज किया है ताकि आरोपी को बचाया जा सके। लिंडा की रहस्मय मौत के एक दिन बाद सात अक्टूबर की सुबह लगभग 800 शरणार्थियों को ब्रू समुदाय वाले गांवों में ले जाने के लिए पहुंचे, लेकिन शरणार्थियों ने लिंडा की मौत को एक मुद्दा बना दिया, जिससे प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया को रोकना पड़ गया।

शरणार्थियों ने लिंडा की मौत की स्वतंत्र जांच और अभियुक्तों के लिए कठोर सजा देने, मिजोरम में रहने वाले प्रत्येक ब्रू परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करन और मिजोरम में ब्रू लोगों के लिए अलग एडीसी की स्थापना करने की भी मांग की। त्रिपुरा पुलिस ने भी मिजोरम पुलिस से ब्रू महिला की हत्या के आरोप की जांच करने और त्रिपुरा - मिजोरम सीमा पर मिश्रित आबादी वाले गांवों में शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। इस बीच, उत्तरी त्रिपुरा जिला प्रशासन के अधिकारियों का मानना ​​है कि शरणार्थियों के प्रत्यावर्तन को रोकने के लिए मौत के मामले को एक मुद्दा बनाया गया जहां एक निहित स्वार्थी समूह ने एक बड़ी भूमिका निभाई थी।

ब्रू शरणार्थी संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हुए त्रिपक्षीय समझौते, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय भी शामिल था, पर हस्ताक्षर करने के एक साल बाद भी पैतृक स्थान पर लौटने की प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं।केंद्र सरकार ने प्रत्यावर्तन को पूरा करने के लिए तीन समय-सीमाएं दीं और इसमें पहले चरण को अगले महीने तक पूरा किया जाना है। शरणार्थियों काे पैतृक स्थान पर लौटने की प्रकिया तीन अक्टूबर को फिर से शुरू हो गया था और लगभग 50 परिवारों के 245 ब्रू शरणार्थी मिजोरम के लिए रवाना हो गए। दूसरा बैच सात अक्टूबर को जाना था और यह कार्य शरणार्थियों के आंदोलन से बाधित हो गया।

इसके अलावा ब्रू शरणार्थी पुनर्वास क्षेत्रों की व्यवस्था, प्रत्येक परिवार को उनके पुनर्वास का क्षेत्र चुनने के लिए स्वतंत्रता, शरणार्थियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती और नकद सहायता आदि की भी मांग कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में पैतृक स्थान लौटने की प्रक्रिया के नौवें चरण के पूरा होने के बाद पुनर्वास के लिए 350 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके अलावा शरणार्थियों के लिए चार लाख रुपये की वित्तीय सहायता, 5,000 रुपये का मासिक भत्ता, घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये और दो साल के लिए मुफ्त रा शन को भी पैकेज में शामिल किया गया है।