कुछ लोग दुनिया में ऐसे होते हैं जो हालातों को बदलने की तमन्ना रखते हैं। मेहनत के पसीने से तर-बतर होकर वो किसी ऐसे काम को अंजाम दे जाते हैं जिसके मिसालें पढ़ी जाती हैं, लिखी जाती हैं या फिर लोगों में बैठकर सुनाई जाती हैं। तेलंगाना की एक महिला ऐसा ही काम रही हैं। वो उन लोगों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश कर रही हैं जो मानसिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं।

36 साल की तस्लीनाम मोहम्मद पेशे से सब रजिस्टार हैं। वो मुलूगू जिले के रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प विभाग में काम करती हैं। इसके साथ-साथ ही जब भी उन्हें वीकेंड पर छुट्टी मिलती हैं तो उन लोगों को खोजती हैं जो गुमशुदा हो चुके हैं। खासतौर से वो मानसिक दिक्कतों के कारण परिवार से जुदा हुए लोगों को उनके परिवारों से मिलवाने का काम करती हैं।

अभी तक तस्लीमा 21 लोगों को उनके परिवार से मिलवा चुकी हैं। ये लोग बस स्टेशन, सड़क के किनारे, फुटपाथ और गलियों में भटकते थे। लेकिन मानसिक दिक्कतें होने के कारण अपने घर से दूर हो गए थे। उन्होंने फिर से उन्हें उनके घर वापस भेजवाने में मदद की। तस्लीमा ने एक लड़के को भी रेस्क्यू किया। उसके माता-पिता यह सोचे बैठे थे कि उनका बेटा मर चुका है लेकिन तस्लीमा ने उसे ढूंढ़ निकाला और परिवार से मिलवाया।

उनका कहना है ‘बीते साल ये हुआ था कि मैं अपने दफ्तर से घर को आ रही थी। मैंने देखा कि एक बुजुर्ग शख्स वहां सड़क पर खड़ा है। मैंने उनसे बात की। उसने मुझे अपने परिवार की जानकारी दी। पुलिस की मदद से हम उसे उसके गांव ले गए और उसे परिवार से मिलवा दिया।’

इन दिनों लोगों की मदद करने के साथ-साथ तस्लीमा खेती भी करती हैं। वो खुद खेतों में काम करती हैं। इस मजदूरी से वो जो पैसे कमाती हैं उन्हें वो मजदूरों में बांट देती हैं। इतना ही नहीं, वो इसमें कुछ और पैसे डालकर उनकी मदद करती हैं।