असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(एआईयूडीएफ) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) का मुस्लिम गुट है और यह भाजपा की बी टीम है। 

गोगोई ने कहा कि एआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को भाजपा के सत्ता में आने के बाद फायदा हुआ है। बकौल गोगोई, दोनों भाजपा और एआईयूडीएफ का चरित्र एक जैसा है। दोनों का मकसद सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़कर सत्ता हासिल करना है। 

बदरुद्दीन अजमल आरएसएस चीफ मोहन भागवत का छोटा भाई है। वे हमेशा हमारे समाज को बांटने की कोशिश करते हैं और हमारी संस्कृति को गुमराह करते हैं। हम हमेशा ऐसी राजनीति से लड़ेंगे। कट्टरपंथी ताकतों के उभार का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा सरकार नई डेवलपमेंट पॉलिसी लाई है, जबकि दूसरी ओर कट्टपंथी ताकतें सिर बढ़ रही है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। 

गोगोई ने कहा कि गौ रक्षा के नाम पर लोगों की हत्या को धर्मनिरपेक्ष देश में सहन नहीं किया जाएगा। सामाजिक सौहार्द और आर्थिक विकास एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए अतिवादी ताकतें प्रत्यक्ष रूप से अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस उनके देश भेजने के लिए कोई काम नहीं हुआ है। 

छिद्रयुक्त अंतरराष्ट्रीय सीमा की फेसिंग के लिए भी कोई काम नहीं हुआ है। भाजपा अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया को सांप्रदायिक तरीके से कर रही है। गोगोई ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल और नरेन्द्र मोदी में बड़ा फर्क है। 

वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान मुरली मनोहर जैसे शिक्षाविद शिक्षा मंत्री बने लेकिन मोदी के शासन में स्मृति ईरानी जैसी व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया गया जिनकी एजुकेशनल क्वाफिकेशंस पर सवालिया निशान है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जो आरबीआई के गर्वनर भी रह चुके हैं, अपने सलाहकारों की सुनते थे लेकिन मोदी खुद ही सारे फैसले लेते हैं। इससे पूरे देश पर प्रभाव पड़ रहा है।