नागरिकता संशोधन विधेयक पर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का प्रयास कर रही है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल पर हमला कर उन्हें जननायक से खलनायक बता रहे हैं। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में गोगोई ने मांग रखी कि राज्य सरकार इस विधेयक पर अपनी स्थिति साफ करे। 

मुख्यमंत्री के विदेश दौरे की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि असम विरोध की आग में जल रही है तथा मुख्यमंत्री विदेश भ्रमण कर रहे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मुख्यमंत्री जनता के प्रति जवाबदेह नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोनोवाल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उनमें लाचित बरफूकन का नहीं, बल्कि बदन बरफूकन का खून है। गोगोई ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ असमिया जाति का अस्तित्व खत्म करना चाहती है। इस जाति को बांटने की साजिश रची जा रही है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री ने माना कि इस विधेयक को लेकर कांग्रेस भी बंटी हुई है। बराक घाटी के कांग्रेसी नेता विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, जबकि ब्रह्मपुत्र घाटी में इसका विरोध हो रहा है। 

उन्होंने कहा कि भाषा आंदोलन के समय भी यही स्थिति थी। उन्होंने साल 2014 में कांग्रेस द्वारा नागरिक संशोधन विधेयक का मसौदा कैबिनेट में पारित करने की बात कहने वाले अपने ही पार्टी के नेता गौतम राय को झूठा करार दिया। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत पर भी निशाधा साधा। यह विधेयक असमिया जाति के अस्तित्व के लिए खतरा है। भाजपा सरकार राज्य की जनता को गुमराह कर रही है। किसी भी दल या संगठन ने इस विधेयक के लिए कोई आवाज नहीं उठाई। भाजपा सरकार अपने फायदे के लिए बराक व ब्रम्हपुत्र घाटी के बीच खाई बनाना चाहती है। कांग्रेस के शासन में समन्वय का माहौल था, मगर अब लोगों को बांट कर समन्वय की डोर को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। गोगोई ने वाणिज्य व उद्योग मंत्री चंद्रमोहन पटवारी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने हिंदू बांग्लादेशियों को शरणार्थी का दर्जा दिए जाने को लेकर कैबिनेट में कोई प्रस्ताव नहीं लिया था। इस बारे में एक अवर सचिव ने केंद्र को पत्र भेजा था।