बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री तनुजा आज 78 वर्ष की हो गयी। 23 सितंबर 1943 को मुंबई में जन्मीं तनुजा के पिता कुमारसेन समर्थ कवि और फिल्म निर्देशक तथा उनकी मां शोभना समर्थ प्रख्यात अभिनेत्री थी। तनुजा ने अपने सिने करियर की शुरूआत बतौर बाल कलाकार वर्ष 1950 में अपनी मां के होम प्रोडक्शन की फिल्म हमारी बेटी से की। इस फिल्म से तनुजा की बड़ी बहन नूतन ने भी अभिनेत्री के तौर पर शुरूआत की थी। 

बता दें कि धर्मेंद्र और तनुजा ने एक साथ कई फिल्में की हैं। बात 1965 की है, दोनों फिल्म 'चांद और सूरज' की शूटिंग कर रहे थे। अच्छे दोस्त होने के नाते दोनों साथ में खूब मस्ती करते थे और शराब पीते थे। यहां तक की धर्मेंद्र ने तनुजा को अपनी पत्नी प्रकाश और बच्चों से भी मिलवाया था।  फिल्म की शूटिंग के दौरान तनूजा और धर्मेंद्र काफी वक़्त साथ गुजारते थे। एक दिन धर्मेंद्र उनके साथ फ्लर्ट करने की कोशिश करने लगे। धर्मेंद्र की इस हरकत तनुजा चौंक गईं। तनुजा को ये बात बिलकुल पसंद नहीं आई उन्होंने धर्मेंद्र की इस आशिक मिजाजी का जवाब थप्पड़ से दिया। उन्होंने साथ ही कहा, बेशर्म, मैं तुम्हारी बीवी को जानती हूं और तुम्हारी इतनी हिम्मत की मुझसे फ्लर्ट करो। इस मामले के बाद धर्मेंद्र काफी शर्मिंदा हुए थे। वह तनूजा से जिद करने लगे कि वो उन्हें अपना भाई बना लें। धर्मेंद्र ने तनुजा से कहा कहा, तनू मेरी मां, मैं सॉरी बोलता हूं। मुझे अपना भाई बना लो। हालांकि, तनूजा ने धर्मेंद्र को ऐसा करने से मना कर दिया, लेकिन मगर धर्मेंद्र इस कदर जिद पर अड़ गए कि आखिरकार तनूजा को उनकी कलाई पर काला धागा बांधकर उन्हें अपना भाई बनाना ही पड़ा।

बता दें कि 13 साल की उम्र में तनुजा पढ़ने के लिये स्विटजरलैंड चली गयी, जहां उन्होंने अंग्रेजी, फ्रेंच और जर्मन भाषाएं भी सीखीं। इसी दौरान तनुजा की मां ने उन्हें लांच करने के लिए 1958 में छबीली नाम से हास्य फिल्म बनाने का फैसला किया। बतौर अभिनेत्री छबीली तनुजा की पहली फिल्म थी। वर्ष 1961 में प्रदर्शित फिल्म हमारी याद आयेगी तनुजा के करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। इस फिल्म में तनुजा ने इतना सहज स्वाभाविक अभिनय किया कि दर्शकों ने महसूस किया कि गीता बाली की असमय मौत के बाद उनके खाली स्थान को भरने वाली नायिका उन्हें मिल गयी है। 

तनुजा ने अपनी जिंदगी बिंदास अंदाज मे जी है। तनुजा ने कभी इस बात की परवाह नहीं की लोग उनके बारे में क्या सोंचते है। एक बार उन्होंने फिल्म बहारें फिर भी आएंगी की शूटिंग के दौरान फिल्मकार गुरदत्त से कह दिया था ऐ गुरू तू जब मर जाएगा, अपनी लाइब्रेरी मेरे नाम लिख जाना। तनुजा उन कुछ अभिनेत्रियों में शामिल थी जो सिगरेट और व्हिस्की पीया करती थीं। हिंदी फिल्मों के अलवा तनुजा ने बंगला फिल्मों में अपनीविशिष्ट पहचान बनायी है। बंगला फिल्मों में तनुजा की जोड़ी उत्तम कुमार और सौमित्र चटर्जी के साथ काफी पसंद की गयी। इसके अलावा तनुजा ने गुजराती, मराठी, मलयालम और पंजाबी भाषाओं की फिल्मों में काम किया। 

तनुजा ने शशधर मुखर्जी के सबसे छोटे पुत्र शोमू मुखर्जी से वर्ष 1973 में शादी कर ली। तनुजा की दो बेटियां है। काजोल ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनायी है, जबकि तनीषा मुखर्जी ने भी कुछ फिल्मों में काम किया, लेकिन वह अपनी बडी बहन काजोल जितनी सफलता हासिल नहीं कर सकीं। तनुजा के सिने करियर में उनकी जोड़ी राजेश खन्ना के साथ काफी पसंद की गयी। वर्ष 1967 में प्रदर्शित फिल्म पैसा या प्यार के लिए तनुजा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया। तनूजा की करियर की कुछ उल्लेखनीय हिन्दी फिल्में हैं नयी उमर की नयी फसल,भूत बंगला, बहारें फिर भी आएंगी, ज्वेल थीफ, दो दूनी चार, जीने की राह, गुस्ताखी माफ, पैसा या प्यार, पवित्र पापी, बचपन, हाथी मेरे साथी, दूर का राही, मेरे जीवन साथी, दो चोर, एक बार मुस्करा दो, अनुभव, अमीर गरीब, इम्तिहान, प्रेम रोग, बेखुदी, साथिया, खाकी आदि।