1971 युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्‍तान (अब बांग्‍लोदश) के तंगैल में भारतीय सेना के खास एयरड्रॉप मिशन को 50 साल पूरे हुए हैं। 11 दिसंबर, 1971 को ले. कर्नल कुलवंत सिंह पन्‍नू के नेतृत्‍व में भारतीय सेना की 2nd पैराशूट बटालियन ने अपना मिशन पूरा करके पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। उस मिशन को अंजाम देने वाले बहादुरों को याद करते हुए आगरा में पैराशूट जम्‍प ऑर्गनाइज किया गया है।

इस हाई जोश भरे इवेंट में कई वेटरंस भी शामिल हुए जिन्‍हें कई हजार फीट की ऊंचाई से एयरड्रॉप किया गया। पहला जम्‍प CDS जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्‍नी मधुलिका और अन्‍य सैनिकों को समर्पित किया गया। जनरल रावत, मधुलिका व अन्‍य सैनिक 8 दिसंबर को एक हेलिकॉप्‍टर क्रैश में शहीद हो गए थे।1971 की जंग में जब पाकिस्‍तानी सेना कमजोर पड़ने लगे तो उसने ढाका से कदम पीछे होने शुरू किए। ले. कर्नल कुलदीप सिंह पन्‍नू की अगुवाई वाली बटालियन को जिम्‍मा सौंपा गया कि वह पाकिस्‍तानी सेना की एक ब्रिगेड को ढाका से वापस लौटने न दे। सेना ने प्‍लान बनाया कि तंगैल के पास मौजूद पुल पर कब्‍जा किया जाए जिससे पाकिस्‍तानी सेना निकल नहीं सके। ब्‍लास्‍ट से पुल उड़ाया जा सकता था मगर भारतीय सेना को भी ढाका पहुंचने की जल्‍दी थी। इसके बाद प्लान बना कि जब पाकिस्‍तानी सेना पुल क्रॉस कर रही होगी तब उन पर हमला किया जाए।इसके बाद सैनिकों को एयरड्रॉप करने का फैसला हुआ। भारतीय वायुसेना के 52 विमानों, लगभग पूरी फ्लीट इस ऑपरेशन का हिस्‍सा बनी। शाम 4.30 बजे का वक्‍त चुना गया क्‍योंकि उस वक्‍त धुंधलका होता है और सैनिकों को इतनी रोशनी भी मिल जाती कि वे आसानी से उतर कर अंधेरा होने तक छिप जाते। दुश्‍मन के इलाके में एक-एक IAF के विमान मंडराने लगे। करीब 700 पैराट्रूपर्स ने हवा में जम्‍प किया और नीचे पहुंचकर दुश्‍मन का इंतजार किया। दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा पैराड्रॉप ऑपरेशन था। चश्‍मदीदों के अनुसार उस दिन आसमान में बस पैराशूट्स ही पैराशूट्स नजर आ रहे थे।भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स सकुशल नीचे उतरे और पुल की सुरक्षा में लगे पाकिस्तानी डिफेंडर्स को मात देकर उस पर कब्‍जा कर लिया। फिर डिफेंसिव पोजिशंस सेटअप की गईं और पाकिस्‍तानी ब्रिगेड का इंतजार किया गया। आधी रात के करीब पाकिस्‍तानी सैनिक जब वहां पहुंचे तो भारतीय सेना को अपने इलाके में इतना भीतर पाकर हैरान रह गए। यह जगह ढाका से महज 70 किलोमीटर दूर थी। हमारे पैराट्रूपर्स ने पाकिस्‍तानी ब्रिगेड की धज्जियां उड़ा दीं। कई सैनिक खुले खेतों में भागे, कुछ लड़ते-लड़ते मारे गए और बहुत सारे बंदी बना लिए गए।आगरा में पैराट्रूपर्स की कमान सेंटल कमांड के ले. जनरल योगेंद्र दिमरी ने की है। 73 साल के ले. जनरल (रिटायर्ड) रंजन गोस्‍वामी ने नौजवान पैराट्रूपर्स के साथ 8,000 फीट की ऊंचाई से जम्‍प किया।उनके अलावा मेजर जनरल (रिटायर्ड) शिव जायसवाल (73), कर्नल (रिटायर्ड) थॉमस कोचप्‍पन (78) और कर्नल (रिटायर्ड) प्रमोद तेम्‍बे ने 3,000-4,000 फीट की ऊंचाई से जम्‍प किया।