अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना (US Army) जाने के बाद अब पहली बार अमेरिका और तालिबान आमने-सामने हो गए हैं। कतर के दोहा में अमेरिकी अधिकारियों और तालिबान के वरिष्ठ अधिकारियों की मुलाकात हुई। इस वार्ता के बाद अमेरिका ने कहा है कि वो तालिबानी सरकार को मान्यता दिए बिना अफगानिस्तान के लोगों की मदद करने के लिए तैयार है। इसके अलावा अमेरिका का ये भी कहना था कि अब तालिबान को उसके बयानों से नहीं बल्कि उसके कार्यों से आंका जाएगा।


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अमेरिकी विदेश विभाग (us foreign department) के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने दोहा वार्ता के दौरान तालिबान प्रतिनिधियों से मुलाकात की और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर चर्चा की। इनमें आतंकवाद, सुरक्षा, आतंकवाद, विदेशी नागरिकों की सुरक्षा शामिल थी। इसके अलावा लड़कियों और महिलाओं के मुद्दों पर भी दोनों देशों ने बात की।

तालिबान (us taliban talk) के इस वार्ता के दौरान तेवर तीखे थे। कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने अमेरिका को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वो अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश ना करें। इस बयान में उन्होंने कहा कि हमने उन्हें साफ तौर पर कह दिया है कि अफगानिस्तान में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश भी मत करना वर्ना ये किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा।