अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पूरी तरह से वापसी के बाद तालिबान ने काबुल के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अपने कब्जे में ले लिया है। इस दौरान वहां पर खड़े होकर, तालिबान नेताओं ने देश को सुरक्षित करने, हवाईअड्डे को फिर से खोलने और पूर्व प्रतिद्वंद्वियों को माफी देने का संकल्प जताया। एयरपोर्ट को फिर से चालू करना तालिबान के सामने 3.8 करोड़ की आबादी वाले देश पर शासन करने की बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो दो दशकों से अरबों डॉलर की विदेशी सहायता पर टिका हुआ था।

इस बीच, अधिकांश अफगान सिख और हिंदू जो पिछले दो सप्ताह से काबुल के पास कर्ता-ए-परवान में गुरुद्वारा दशमेश पिता में शरण लिए हुए थे वे अफगानिस्तान में अपने गृहनगर लौट चुके हैं। लोगों ने अपना कामकाज फिर से शुरू कर दिया है। हालांकि कुछ परिवार अब भी गुरुद्वारे में हैं।
       
यह रिपोर्ट, तालिबान प्रवक्ता ज़ाहेबुल्लाह मुजाहिद के उस बयान के बीच सामने आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन 140 अफगान सिखों और हिंदुओं के एक समूह को काबुल हवाई अड्डे तक पहुंचने से रोका गया था उन्हें देश छोड़ने की अनुमति दी जा सकती है।
काबुल में करीब 40 अफगान सिख और हिंदू दुकानें चलाते हैं और अपना कामधंधा करते हैं। वे अब काम पर लौटने लगे हैं। मेरे भाई का भारतीय फार्मा के साथ दवाओं का थोक कारोबार है और वह काम पर वापस आ गया है। तालिबान कमांडरों ने हमें सुरक्षा का आश्वासन दिया है और हमें काम शुरू करने को कहा है। लिहाजा हमने अभी अपनी दुकानें खोल दी हैं।

एक अफगान हिंदू ने बताया कि उन्होंने दुकानें खोली हैं लेकिन मुश्किल से दुकान चल रही है। उन्होंने बताया कि वो कुछ घंटों के लिए दुकान पर बैठते हैं और इसके बाद घर चले जाते हैं। बहुत कम ग्राहक आ रहे हैं। लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। कॉस्मेटिक की दुकान चलाने वाले दुकानदार को उम्मीद थी कि कामधंधा समय के साथ रफ्तार पकड़ेगा।

इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने कहा कि तालिबान प्रवक्ता ज़ाहेबुल्लाह मुजाहिद ने एक अफगान न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अफगान हिंदुओं के जाने के लिए अपनी सरकार की सहमति के बारे में बताया। उन्होंने हिंदुओं और सिखों को वैलिड दस्तावेज के साथ भारत जाने का आश्वासन दिया। ऐसे में भारत आने के इच्छुक अफगानों के लिए किरण की उम्मीद जगी है।

पुनीत सिंह चंडोक ने कहा कि इस सप्ताह के अंत तक कुछ स्पष्ट हो जाना चाहिए कि अफगान सिख और हिंदू कब दिल्ली के लिए रवाना हो सकेंगे। हमें काबुल हवाईअड्डे पर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करना होगा क्योंकि तालिबान ने अमेरिका के जाने के बाद हवाईअड्डे का संचालन तुर्की और कतर को सौंप दिया है।

पुनीत सिंह चंडोक ने बताया, 'तालिबान के प्रतिनिधि बिलाल करीमी ने हमें आश्वासन दिया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी सिख उनकी संस्कृति और उनके देश का हिस्सा हैं।' उन्होंने कहा कि भारत का विदेश मंत्रालय भी अफगानिस्तान में गुरुद्वारों के प्रमुखों के लगातार संपर्क में है।