केंद्र सरकार ने युद्धग्रस्त देश से फंसे हुए हिंदुओं और सिखों सहित भारतीय और अफगानी नागरिकों को निकालने में तेजी लाने के लिए अफगानिस्तान के पास विदेशी मिशनों को सक्रिय कर दिया है। सरकारी अधिकारियों ने यहां सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अधिकारी ताजिकिस्तान और कतर में भारतीय दूतावासों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं ताकि वहां से भारतीय और अफगानी नागरिकों को निकालने में मदद मिल सके। भारत ने उनसे लोगों के परिवहन, ठहरने और अन्य आवश्यक सहायता जैसी सभी सहायता प्रदान करने के लिए कहा है।

भारतीय अधिकारियों को भी एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। कई भारतीय कामगार अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं और उन्हें भूमि मार्गों से दोहा जैसे नजदीकी भारतीय दूतावासों में ले जाने के बीच तालिबान मिलिशिया की ओर से काफिले पर हमले का खतरा भी है। इस बीच, दिल्ली में विदेश मंत्रालय (एमईए) में स्थापित ‘अफगानिस्तान सेल’ चौबीसों घंटे काम कर रहा है ताकि उन लोगों के सवालों का तुरंत जवाब दिया जा सके, जिन्होंने विदेश मंत्रालय से भारत आने का अनुरोध किया है। अधिकारी ने कहा कि अब तक कुल 1,650 भारतीयों ने इस सेल में अपना अनुरोध दर्ज कराया है और उन्होंने 2,000 से अधिक कॉल, 600 वॉट्सएप संदेश और 1200 ई-मेल का जवाब दिया है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि रविवार शाम तक, कुल 526 व्यक्ति दिल्ली पहुंच चुके हैं।

सूत्रों ने कहा कि यह आशंका है कि तालिबान मिलिशिया अफगान जन प्रतिनिधियों को भारतीय वायुसेना की उड़ान से रोक सकती है, इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना को तब तक गुप्त रखा गया, जब तक कि अफगानिस्तान से उड़ान नहीं भर गई। एक अधिकारी ने काबुल हवाई अड्डे से सैन्य विमान की देरी के बारे में बताया, अमेरिकी अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है और वे युद्धग्रस्त देश से हवाई संचालन का प्रबंधन कर रहे हैं। इस भारी भीड़ में, एक विमान के लिए एक स्लॉट तैयार करना और निकासी उड़ान के लिए एक सुरक्षित हवाई मार्ग भी अमेरिकी प्राधिकरण के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। काबुल हवाई अड्डे को वाणिज्यिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया गया है और केवल सैन्य विमानों को ही वहां से उतरने और उड़ान भरने की अनुमति है।