ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ताइवान और भारत के क्षेत्रों पर चीन का दावा बेतुका है। उन्होंने कहा है कि चीन ऐसे दावे कर रहा है जो यथास्थिति के खिलाफ है। इतना ही नहीं ये दावे सिर्फ बेतुके नहीं बल्कि बेहद खतरनाक भी हो सकते हैं।

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वू ने कहा है कि बीजिंग पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर, ताइवान और भारत के कुछ हिस्सों को अपना बताता है। चीन के इन दावों के कारण क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है। बता दें कि जून 2020 में भारतीय सैनिकों ने चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा पूर्वी लद्दाख में यथास्थिति बदलने के मकसद को नाकाम कर दिया था। इस हिंसक संघर्ष में दोनों पक्षों के जवान मारे गए थे। इस घटना के बाद दोनों पक्ष कई दौर की वार्ता कर चुके हैं लेकिन अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है।

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भारत ने लगातार कहा है कि दोनों पक्षों के बीच संबंधों में दरार चीन द्वारा यथास्थिति बदलने की कोशिश करने और सीमा समझौते का सम्मान नहीं करने से कारण हुई है। भारत के विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि चीन के साथ द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों विकसित करने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर यथास्थिति में बदलाव नहीं करना चाहिए।

इस बीच ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने चिंता जताते हुए कहा है कि चीन के दावे उसी तरह हैं जैसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में अपना तथाकथित सैन्य अभियान शुरू करने से पहले किया था। यूक्रेन में पिछले 70 दिनों से युद्ध जारी है। 10 लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिक शरणार्थी बन गए हैं और रूसी सैनिक यूक्रेन के शहरों पर बमबारी कर रहे हैं।

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वू न ताइवान को लेकर कहा है कि चीन हम कर कोई शर्त नहीं लगा सकता और कह सकता है कि हमें मानना होगा कि हम चीन का हिस्सा है। वू ने अमेरिका पर भरोसा जताते हुए कहा है कि ताइवान पर चीनी हमले के केस में अमेरिकी सरकार ताइवान को हर तरह से मदद करने को तैयार है। हम अपना बचाव करने के लिए तैयार हैं।