नागालैंड के विधानसभा चुनाव में आज से केवल 3 ही दिन बचे हैं। राज्य की 59 सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान होगा लेकिन इस बार भी सबकी नजरें पेरेन सीट पर हैं क्योंकि इस सीट पर नगा पीपुल फ्रंट से दो बार मुख्यमंत्री रह चुके टी आर जेलियांग चुनाव लड़ रहे हैं। आपको बता दें कि इस बार 2018 के चुनावों में पेरेन सीट से सिर्फ दो ही पार्टियों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं जिसमें एनपीएफ से टी आर जेलियांग और एनडीपीपी से इहेरी नदांग चुनावी मैदान में हैं।

इससे पहले जेलियांग ने 2008 आैर 2013 में भी पेरेन से ही चुनाव लड़ा था। 2013 में जेलियांग ने कांग्रेस के इहेरी नदांग को 2636 मतों से हरा कर जीत दर्ज की थी। ताे वहीं 2008 में कांग्रेस के ही वास्तु मेरी काे 3879 मतों से हराया था। इस बार भी जेलियांग खिलाफ चुनावी मैदान में भाजपा की सहयोगी पार्टी एनडीपीपी के इहेरी नंदाग है।

बात करें अगर पेरेन सीट की तो पिछले तीन सालों से इस सीट पर एनडीएफ का दबदबा है जिसमें 2003  में वात्सू मेरु ने कांग्रेस के उम्मीदवार नेइबा नदांग को 1211 वोटों से मात दी थी इसके बाद 2008 में वास्तु मेरी कांग्रेस में शामिल हो गए और इस बार एनडीएफ ने पेरेन सीट से जेलियांग को चुनावी मैदान में उतरा जिसमें जेलियांग जीत हासिल की और अपने प्रतिद्वंदी वास्तु मेरी को 3879 वोटों से करारी हार दी। इसके बाद 2013 एक बार फिर से एनडीएफ ने पेरेन सीट से अपने पुराने धुरंधर जेलियांग को ही चुनावी मैदान में उतारा तो वहीं उनके मुकाबले में कांग्रेस ने इस सीट से इहेरी नदांग को उतारा और इस बार भी जेलियांग ने 2636 वोटों से जीत हासिल की।

इस बार भी मुकाबला एनडीएफ के उम्मीदवार टीआर जेलियांग V/S  इहेरी नदांग ही लेकिन इस बार इहेरी कांग्रेस से चुनाव ना लड़कर एनडीपीपी से चुनावी मैदान में और इस बार ये देखना काफी दिलचस्प रहेगा कि क्या इस बार जेलियांग जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे या इहेरी पेरेन सीट एनडीएफ के हाथों से छीन लेंगे। 


बात करें अगर पेरेन विधानसभा सीट की तो पेरेन ग्यारहवें और नागालैंड का सबसे नया जिला है, जिसे कोहिमा जिले के विभाजन के परिणामस्वरूप बनाया गया था। यह असम राज्य और पश्चिम और उत्तर पश्चिमी भाग में दीमापुर जिले, क्रमशः पूर्व और दक्षिणी भाग में कोहिमा जिले और मणिपुर राज्य से घिरा है। पेरेन जिला का मुख्यालय पेरेन (समुद्र तल से लगभग 1,445 मीटर) है। पेरेन, जलोकी और टेनिंग जिला के प्रमुख शहरों हैं। अधिकांश निवासियों में ज़ीलियांग और कूकी जनजातियां हैं।

गौरतलब है कि इस बार 60 सदस्यों वाली नगालैंड विधानसभा में 195 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से केवल पांच महिलाएं हैं बात करें अगर नगालैंड के चुनावी इतहास कि तो नागालैंड के पहले राज्य विधानसभा चुनावों में राज्य को 46 सीट आवंटित किए गए थे जिसमें 40 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव हुए। टयूएनसांग जिला को अपनी 6 सीटों को आवंटित किया गया था, इसके क्षेत्रीय परिषद द्वारा चुने गए सदस्यों द्वारा भरे जाने के लिए दूसरे विधानसभा चुनावों में निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 52 हो गई। अंत में 1974 में तीसरे विधानसभा चुनाव में, निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 60 हो गई, जो कि राज्य विधानसभा के निचले सदन की वर्तमान ताकत है। नागलैंड की 60 विधान सभा सीटों में से 59 अनुसूचित जनजाति से संबंधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं जिसमें से सिर्फ एक सीट पर जरनल कैंडिडेट चुनाव लड़ रहा है तो वहीं बाकि बची सभी सीटों पर अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार हैं।


नागालैंड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में दीमापुर 1, दीमापुर 2, उत्तरी अंगामी 1, उत्तरी अंगामी 2, पेरेन, पश्चिमी अंगामी, इम्पापुर, घसानी-आई, घस्साानी-द्वितीय, कोहिमा टाउन, त्समिनीउ, फाफूटोरो, चिज़ामी, चज़ौबा, फेक, अलॉंगटाकी, मेलुरी, पंग्रो-किप्इर, थोनोकनु, नोल्कल, टोबू, नोक्सन, तामलू, मोका, अबी, सोम टाउन, तापी, टीजित, वाक्किंज, सानिस, टाईई और भंडारी शामिल हैं । नागालैंड में कुल 11,91,513 मतदाताओं में से 6,01,707 (50.50 प्रतिशत) पुरुष मतदाता हैं और 5,89,806 (49.50 प्रतिशत) महिलाएं है।