एम्स के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो अतुल अंबेकर ने बताया कि सिरिंज से नशा करने वाले युवाओं में एचआइवी और एड्स का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद स्थित केंद्र की उनकी ओपीडी में रोजाना नशे के आदी करीब 150 मरीज आते हैं। जिनमें से करीब 10 से 15 फीसद मरीज सिरिंज से नशा करने वाले होते हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से करीब पांच से 10 फीसद मरीजों में एचआइवी या एड्स के संक्रमण पाए जाते हैं।

हालांकि, जागरूकता व नियमित इलाज से गर्भवती महिलाओं से शिशुओं में होने वाले एचआइवी संक्रमण के मामलों में कमी आई है। न केवल पंजाब बल्कि जम्मू कश्मीर व पूर्वोत्तर के राज्य भी इसमें शामिल है जहां की युवा पीढ़ी इन बीमारियों की चपेट में आ रही है।

डॉ अतुल अंबेकर ने बताया कि सिरिंज से नशा करने वालों मरीजों को एड्स व एचआइवी से बचाने के लिए मुफ्त सिंरिंज मुहैया कराई जानी चाहिए ताकि कम से कम वे जानलेवा बीमारी से बचाए जा सकें। उन्होंने बताया कि सरकार की इस मामले में बाकायदा नीति भी है। इसके तहत मुफ्त सिरिंज की योजना को और बढ़ाए जाने की दरकार है। वहीं, विश्व एड्स दिवस पर सोशल इंपावरमेंट विलेजर्स एसोसिएशन (सेवा), आयुषधाम शोध संस्थान एवं राष्टधर्म फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में इंडिया गेट पर जागरूकता रैली का आयोजन किया।


सेवा के सचिव राकेश कुमार ने कहा कि 25 से 34 आयु वर्ग के 42 फीसद और 35 से 49 आयु वर्ग के 26 फीसद लोग एड्स के शिकार हैं। मिजोरम की 11 लाख की आबादी में 18 हजार से अधिक लोग एड्स पीड़ित है। मणिपुर में 1.43 फीसद तो नागालैंड में 1.15 फीसद आबादी एड्स से पीड़ित है। चौंकाने बाली बात यह है की विश्व में एड्स प्रभावित सूची में भारत तीसरे स्थान पर है। 15 से 49 वर्ष की उम्र के बीच लगभग 25 लाख लोग एड्स पीड़ित हैं।

अब हम twitter पर भी उपलब्ध हैं। ताजा एवं बेहतरीन खबरों के लिए Follow करें हमारा पेज : https://twitter.com/dailynews360