जम्मू-कश्मीर सरकार ने हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के बेटे और कश्मीरी पंडितों की हत्या के लिए कुख्यात फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कटारे की पत्नी समेत चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि केन्द्र शासित प्रदेश की सरकार ने बिट्टा की पत्नी असबाह खान और सैयद अब्दुल मुईद तथा दो अन्य को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में अनुच्छेद 311 के तहत नौकरी से हटाया गया है।

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उन्होंने बताया कि बर्खास्त किए गए अन्य कर्मचारियों में कश्मीर विश्वविद्यालय के दो अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस और एजेंसियों ने इन कर्मचारियों को राज्य विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया है। उन्होंने बताया कि खुफिया जानकारी, रिकॉर्ड और संज्ञेय सामग्री की जांच के लिए गठित एक समिति ने कश्मीर विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान के स्नातकोत्तर विभाग में वैज्ञानिक-डी पद पर तैनात डॉ. मुईद अहमद भट को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। माजिद हुसैन कादरी कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर तथा जबकि सैयद अब्दुल मुईद प्रबंधक, आईटी, जेकेईडीआई और असबाह-उल-अर्जमंद खान, एक केएएस अधिकारी डीपीओ, प्रचार, ग्रामीण विकास निदेशालय में थे। 

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एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भट को पाकिस्तान तथा उसके प्रतिनिधियों के कार्यक्रम और एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों को कट्टरपंथी बनाकर कश्मीर विश्वविद्यालय में अलगाववादी-आतंकवादी एजेंडे के प्रचार में शामिल पाया गया है। उन्होंने कहा कि कादरी का लश्कर-ए-तैयबा समेत आतंकवादी संगठनों से पुराना नाता है। उस पर पहले भी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और आतंकवाद से संबंधित विभिन्न मामलों से संबंधित धारा 302, 307, और 427, 7/27 के तहत कई प्राथमिकी दर्ज है। उन्होंने बताया कि सैयद सलाहुद्दीन के बेटा पंपोर के सेम्पोरा में जेकेईडीआई परिसर पर तीन आतंकवादी हमलों में उसकी भूमिका रही है और संस्थान में उसकी उपस्थिति ने अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा मिला है। 

उन्होंने कहा कि असबाह-उल-अर्जमंद खान को पासपोर्ट के लिए झूठी सूचना देने में शामिल पाया गया है। उसके विदेशी और आईएसआई के लोगों के संबंध पाये गये है। बयान में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए धन लाने में उसकी संलिप्तता पाई गई है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 311 के प्रावधानों के तहत सरकारी कर्मचारियों को तब बर्खास्त किया जा रहा है। बर्खास्त कर्मचारी केवल उच्च न्यायालय में सरकार के फैसले को चुनौती दे सकते हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने बर्खास्त करने पर असहमति दर्ज की। लोन ने कहा, भारत के प्रत्येक नागरिक के अपने अधिकार हैं। एक बेटे को उसके पिता या पत्नी के लिए तथा उसके पति के लिए या पिता को अपने बेटे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। यह दुख की बात है। रिश्तेदारी का इस्तेमाल लोगों को बर्खास्त करने का क्या औचित्य है। यह बस अच्छा नहीं है। पूरी विनम्रता के साथ मैं इसको लेकर अपनी असहमति दर्ज करता हूं।