कश्मीर में भारत के खिलाफ नफरत फैलाने और आतंकवाद के फंडिंग करने वाले हुर्रियत के नेता सैयद अली शाह गिलानी को पाकिस्तान ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित करने का फैसला किया है। 

पाकिस्तानी सीनेट ने ऐलान किया कि गिलानी को पाकिस्तान के सबसे बड़े सिविलयन अवॉर्ड निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह सम्मान गिलानी को भारत के खिलाफ काम करने के ईनाम के रूप में दिया जा रहा है। इतना ही नहीं गिलानी के नाम पर एक विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव भी सीनेट में रखा गया है। 90 साल का गिलानी मूल रूप से बारामुला जिले के सोपोर टाउन का रहने वाला है।

यह फैसला पाकिस्तानी सीनेटर मुश्ताक अहमद ने लिया था, जिसे वहां के सदन ने ध्वनिमत से पास किया। गौरतलब है कि पाकिस्तानी सीनेट ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के खत्म होने की पहली वर्षगांठ पर पाक अधिकृत कश्मीर में बनी अपनी कथित विधानसभा में एक विशेष सत्र बुलाने को भी मंजूरी दी है। गिलानी ने हाल ही में कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत से इस्तीफा दे दिया था। गिलानी कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा के हालातों के लिए जिम्मेदार लोगों में प्रमुख रूप से नामजद रहा है। उसपर साल 2016 में हुई कश्मीर हिंसा के बाद टेरर फंडिंग के चार्ज भी लगे थे। लंबे वक्त से कश्मीर के उसे उसके ही घर में नजरबंद भी रखा गया है।