अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वामी आनंद गिरी को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी, श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर से निष्कासित करने का फैसला लिया है।  स्वामी आनंद गिरी प्रयागराज में संगम पर स्थित बड़े हनुमान मंदिर के छोटे महंत थे और उन पर आरोप था कि मठ-मंदिर की संपत्ति का इस्तेमाल वो अपने परिवार के लिए कर रहे थे। 

इस बारे में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि जांच में स्वामी नरेंद्र गिरी के खिलाफ लगे आरोप सही पाए गए, जिसके बाद उनको निष्कासित कर दिया गया। महंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि संन्यास लेने के बाद परिवार से संबंध रखना वर्जित है। 

स्वामी नरेंद्र गिरी अपने परिवार से संबंध रखे हुए थे और मठ व मंदिर की संपत्ति को वो उन पर खर्च करते थे।  स्वामी आनंद गिरी के निष्कासन के फैसले से पहले उन पर लगे आरोपों की पंच परमेश्वरों से जांच कराई गई।  

जांच में आरोप सही पाए जाने पर महंत नरेंद्र गिरी ने स्वामी आनंद गिरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।  स्वामी आनंद गिरी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हरिद्वार में पंच परमेश्वर कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें उनके अखाड़ा श्री निरंजनी, श्री मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर से निष्कासन के फैसले पर मुहर लगाई गई। 

स्वामी आनंद गिरी को 2019 में ऑस्ट्रेलिया में जेल की हवा खानी पड़ी थी तब वह सुर्खियों में आए थे। उन पर शिष्याओं से मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का आरोप था। बाद में वे सिडनी कोर्ट से बरी हो गए थे।  

इसके बाद पासपोर्ट वापस मिलने पर स्वामी आनंद गिरी वापस भारत लौटे थे। स्वामी आनंद गिरी महंत नरेंद्र गिरी के करीबी शिष्य थे। महंत नरेंद्र गिरी ही उनको हरिद्वार से प्रयागराज लाए थे। स्वामी आनंद गिरी ने योग से अपनी पहचान बनाई थी और विदेशों में वे योग सिखाने जाया करते थे।