पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 100 प्रतिशत ईवीएम-वीवीपेट मिलान की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।  तृणमूल कांग्रेस नेता गोपाल सेठ की याचिका में कहा गया था कि इससे पूरी तरह पारदर्शी चुनाव होगा।  लेकिन कोर्ट ने कहा कि आधे से ज़्यादा चुनाव बीत जाने के बाद दखल प्रक्रिया में अब दखल नहीं दिया जाएगा।  याचिकाकर्ता को चुनाव से पहले ही चुनाव आयोग से मांग करनी चाहिए थी। 

वर्तमान में हर विधानसभा के 5 ईवीएम का वीवीपेट से मिलान होता है।  यह व्यवस्था 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ही बनाई थी। तब कोर्ट ने 50 प्रतिशत ईवीएम-वीवीपेट मिलान की मांग को अव्यवहारिक बताते हुए खारिज कर दिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यह मांग कांग्रेस, सपा, बसपा, आरजेडी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, सीपीएम और तेलगु देशम समेत कुल 21 पार्टियों ने की थी। 

8 अप्रैल 2019 को तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने ईवीएम-वीवीपेट का मिलान 50 प्रतिशत करने से मना कर दिया था।  कोर्ट ने कहा था, याचिका में जो मांग की गई है, उससे मौजूदा मिलान प्रक्रिया 125 गुणा बढ़ जाएगी. ये पूरी तरह अव्यवहारिक होगा। लेकिन फिर भी हम इस दलील से सहमत हैं कि चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा विश्वसनीय बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इसलिए यह आदेश देते हैं कि हर विधानसभा क्षेत्र से 5 ईवीएम मशीनों का वीवीपेट की पर्चियों से मिलान करवाया जाए। 

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से पहले हर विधानसभा की सिर्फ एक ईवीएम का वीवीपेट पर्ची से मिलान होता था।  इसके बाद कुछ और मौकों पर इस विषय पर याचिका दाखिल हुई। कोर्ट ने हर बार कहा कि एक ही मसले पर बार-बार सुनवाई नहीं हो सकती।  अगर चुनाव आयोग को ज़रूरी लगे और वह प्रशासनिक व्यवस्था कर पाने में सक्षम हो तो खुद इस संख्या को बढ़ाने पर विचार कर सकता है।  तृणमूल कांग्रेस नेता की याचिका ठुकराते हुए भी कोर्ट ने यह बात कही है।