हम में से बहुत से लोगों ने निम्बूज (Nimbooz) पिया होगा लेकिन कभी सोचा है कि यह एक नींबू पानी है या फ्रूट जूस? अगर नहीं तो, अब सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला देगा कि यह नींबू पानी है या फ्रूट जूस।

यह भी पढ़े : क्रिप्टो मार्केट में तेजी , Bitcoin और Ether को भी मिली अच्‍छी बढ़त, जानिए Cryptocurrency का हाल

सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करने के लिए सहमत हो गया है कि पॉपुलर सॉफ्ट ड्रिंक 'निंबूज' नींबू पानी है या फ्रूट पल्प या या जूस बेस्ड ड्रिंक है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए जाने के बाद, इस प्रोडक्ट पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क की सही मात्रा निर्धारित होगी। 

बता दें कि 'निंबूज' को 2013 में पेप्सिको द्वारा लॉन्च किया गया था और ड्रिंक को बिना फिज के असली नींबू के रस से बना बताया गया था। इससे इसके वर्गीकरण के बारे में बहस छिड़ गई - क्या इसे नींबू पानी या फ्रूट जूस/ फ्रूट पल्प पर आधारित रस माना जाना चाहिए।

यह भी पढ़े : साइबर अपराध करने वालों की अब खैर नहीं , यूपी पुलिस ने निकला अनोखा तरीका, 'हीरोपंती 2' के ट्रेलर के जरिए बताया 'हम हैं तैयार'

याचिका पर जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्न की दो-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी। अदालत ने 11 मार्च को सुनवाई में घोषणा की थी। मामला मार्च 2015 से चल रहा है, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर, 'निंबूज' का वर्गीकरण होगा। 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका आराधना फूड्स नाम की एक कंपनी ने दायर की है जो चाहती है कि इस ड्रिंक को 'फ्रूट पल्प या फ्रूट जूस बेस्ड ड्रिंक' की वर्तमान स्थिति के बजाय नींबू पानी के रूप में वर्गीकृत किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल में याचिका पर सुनवाई होने की उम्मीद है।

वर्तमान वर्गीकरण पिछले साल नवंबर में सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी) की इलाहाबाद पीठ के फैसले पर आधारित है। न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति पी वेंकट सुब्बा राव की पीठ ने अपने फैसले में 'निंबूज' को फलों के रस पर आधारित ड्रिंक के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके कारण यह केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ आइटम 2202 90 20 के तहत आया।

मेसर्स आराधना फूड्स ने उस आदेश को रद्द करने के लिए याचिका दायर की है, जिसमें तर्क दिया गया है कि ड्रिंक को केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम 1985 की पहली अनुसूची के सीईटीएच 2022 10 20 के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए। कंपनी को फरवरी 2009 से दिसंबर 2013 तक नींबू पानी के रूप में शुल्क का भुगतान करने के लिए कहा गया था।