सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अलग-अलग हाईकोर्ट में ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉम्र्स के कंटेंट पर विनियमन (रेगुलेशन) की मांग वाली लंबित याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की और सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील पेश की। शीर्ष अदालत ने विभिन्न हाई कोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी और कहा कि वह होली के बाद दूसरे सप्ताह में इस मामले की सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत अधिवक्ता शशांक शेखर झा और एनजीओ जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफार्मों पर सामग्री के विनियमन की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान, मेहता ने कहा कि सरकार द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका के संबंध में एक से अधिक हाईकोर्ट इस मामले से निपट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हुआ है कि हाईकोट्र्स ने कहा है कि वे इस मामले को तब तक आगे बढ़ाएंगे, जब तक कि शीर्ष अदालत द्वारा इस पर रोक नहीं लगा दी जाती। पीठ ने कहा कि जब शीर्ष अदालत द्वारा एक हस्तांतरण में नोटिस जारी किया जाता है, तो न्यायाधीश अक्सर कहते हैं कि मामला शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।

अधिवक्ता सत्यम सिंह के माध्यम से एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा है, ‘‘केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए नियम इसके सही कार्यान्वयन के लिए किसी भी प्रभावी तंत्र के बिना दिशानिर्देशों की प्रकृति में कहीं अधिक हैं। यह नियमों के उल्लंघन के लिए किसी भी दंड या सजा का प्रावधान नहीं करता है। कानून के बिना, ओटीटी प्लेटफार्मों पर सामग्री (कंटेंट) का प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सकता है।’’ एनजीओ ने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए दिशानिर्देश लाने में सरकार की मंशा वास्तव में सराहनीय है, लेकिन इसमें कई दोष और खामियां भी हैं। इसने यह भी कहा कि भारत सरकार ओटीटी प्लेटफार्मों पर कंटेंट टेलीकास्ट की स्क्रीनिंग पर ध्यान देने में विफल रही है। उचित स्क्रीनिंग तंत्र की कमी के मद्देनजर, ओटीटी प्लेटफॉर्म सामग्री को अश्लील तरीके से पेश करते हैं। इसलिए इस पर कानून की जरूरत है।