सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन' योजना का विवरण मुहैया कराने के लिए कहा है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने 29 मई को COVID के कारण अनाथ बच्चों के लाभ के लिए की थी। अदालत ने कहा है कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने उक्त योजना का विवरण दाखिल करने का बीड़ा उठाया है, जिसमें लाभार्थियों की पहचान और इसकी निगरानी के लिए अपनाए जाने वाले तंत्र शामिल हैं।

पीठ ने कहा, "एएसजी ऐश्वर्या भाटी उक्त योजना के लाभार्थियों की पहचान सहित योजना का विवरण दाखिल करने का वचन देती है। केंद्र उस तंत्र से संबंधित जानकारी भी प्रस्तुत करेगा जिसे योजना की निगरानी के लिए अपनाया जाएगा।" 

योजना जारी करने के संबंध में दी गई प्रस्तुतियां के बाद निर्देश जारी किया गया था. क्योंकि इसके बारे में पर्याप्त विवरण उपलब्ध नहीं था। खंडपीठ ने देखा कि योजना के विवरण उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद भारत सरकार को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित योजना का आवश्यक विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

बेंच ने कहा, "नोट में 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन' का उल्लेख किया, जिसकी घोषणा 29 मई को प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी। इस योजना के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन बच्चों ने कोरोना के दौरान माता-पिता, कानूनी माता-पिता या दत्तक दोनों को खो दिया है, केंद्र सरकार की योजना के लाभार्थी होंगे।" 

न्यायमूर्ति नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने आज जब मामले की सुनवाई शुरू की, तो कोर्ट द्वारा अवकोलन के लिए तैनात वकील यानी न्यायालय मित्र ने अदालत को सूचित किया कि सरकार पीएम केयर्स फंड से एक योजना लेकर आई है। न्यायालय मित्र गौरव अग्रवाल ने कहा कि योजना शुरू की गई है, लेकिन प्रेस नोट के अलावा वास्तविक योजना उपलब्ध नहीं है।

न्यायलय मित्र ने कोर्ट को कहा, "प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इन बच्चों की शिक्षा जारी रखेगी। किताबें, ड्रेसस आदि सहित शैक्षणिक आवश्यकताएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। 23 वर्ष की आयु में बच्चे को 10 लाख की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।" नोट में कहा गया, "हम नहीं जानते कि कितने बच्चे इस योजना के लाभार्थी हैं और भारत सरकार इस योजना को कैसे लागू करना चाहती है। 

यह स्पष्ट नहीं है।" सरकार की ओर से पेश एएसजी भाटी ने न्यायालय मित्र से सहमति जताई और कहा कि पीएम केयर्स योजना के तौर-तरीके स्पष्ट नहीं हैं,और इस पर काम करने की जरूरत है। बेंच ने कहा, "आप एक हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। या फिर पीएम केयर्स फंड के तहत किए गए पैकेज की घोषणा के कार्यान्वयन पर एक नोट दे सकते हैं।" 

पीठ बाल संरक्षण गृहों में कोविड के संक्रमण के संबंध में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को सभी जिला अधिकारियों को मार्च 2020 के बाद अनाथ बच्चों की जानकारी एनसीपीसीआर 'बाल स्वराज' के पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था और बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए कदम उठाने का भी निर्देश दिया था।

कोरोना महामारी की वजह से अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे आए हैं और पीएम केयर फंड से कई योजनाओं का ऐलान किया है। कोरोना से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक में मोदी सरकार मदद करेगी।

 प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि कोरोना महामारी में माता-पिता गंवाने वाले बच्चों की 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन' योजना के तहत मदद की जाएगी। सरकार की ओर से अनाथ बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी और उनका हेल्थ बीमा भी किया जाएगा।

पीएमओ ने कहा कि कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों को 18 वर्ष होने पर मासिक भत्ता दिया जाएगा और 23 वर्ष होने पर पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। उनकी मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। 

पीएमओ ने कहा कि कोरोना की वजह से अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को 18 साल की अवधि तक पांच लाख का मुफ्त हेल्थ बीमा भी मिलेगा। साथ ही ऐसे बच्चों की उच्छ शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन दिलाने में मदद की जाएगी और इसका ब्याज पीएम केयर्स फंड से वहन किया जाएगा।