मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सैन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। करीब 700 सैन्य अधिकारियों की ओर से यह याचिका दायर की थी। मालूम हो कि मणिपुर एवं जम्मू व कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) लागू है।

न्यायमर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सैन्य अधिकारियों द्वारा इस याचिका को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार ने भी सैन्य अधिकारियों की याचिका का समर्थन किया था। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसे लेकर कोई क्रियाविधि होनी चाहिए, जिससे कि आतंकवाद से लड़ते वक्त हमारे सैन्य अधिकारियों विचलित न हो। 

इस पर पीठ ने कहा कि ऐसा करने से सरकार को किसने रोका है। पीठ ने कहा कि इस पर विचार करना सरकार का काम है न कि अदालत का। याचिकाकर्ता सैन्यकर्मियों का कहना था कि अशांत क्षेत्रों में ड्यूटी निभाने पर उनकेखिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। सैन्यकर्मियों केखिलाफ एफआईआर दर्ज करना और उनके खिलाफ अभियोजन चलना आफस्पा के प्रावधानों के खिलाफ है क्योंकि ऑफिसियल ड्यूटी करने पर उनके खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। 

सैन्य अधिकारियों को इससे छूट मिली हुई है। सैन्य अधिकारियों के खिलाफ इस तरह का मुकदमा दर्ज होने से सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों का मनोबल गिरता है। मणिपुर जैसे अशांत इलाकों में सैन्यकर्मियों पर ज्यादती करने और फर्जी एनकाउंटर का मामला दर्ज किया जा रहा है।