उच्चतम न्यायालय के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) प्रकाशन की तिथि को इस साल की 31 जुलाई से बढ़ाकर सितंबर तक कर देने से इंकार का अखिल असम छात्र संघ (आसू) ने स्वागत किया है। आसू सलाहकार डा. समुज्जवल कुमार भट्टाचार्या ने जारी एक विज्ञप्ति में उच्चतम न्यायालय के हवाले से कहा है कि अब एनआरसी अद्यतन और आगामी लोकसभा चुनाव कार्य साथ-साथ चलेंगे।


लिहाजा इस बात पर ध्यान रखना जरूरी है कि लोकसभा चुनाव के कार्य के चलते एनआरसी अद्यतन का काम परभावित न हो। कोर्ट का आदेश असम सरकार द्वारा समय सीमा बढ़ाने के लिए दयार याचिका के बाद आया है। राज्य सरकार ने समय सीमा बढा़ने की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए कोर्ट से मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर जल्द सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह याचिका पर विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में असम की ओर पेश हुए सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कोर्ट की बेंच ने आदेश दिया है कि वे असम के चीफ सेक्रेटरी, राज्य एनआरसी समन्वयक प्रतीक हजेला और चुनाव आयोग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि चुनावों के दौरान ही एनआरसी के कार्य को कैसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। कोर्ट ने इस बैठक को 31 जनवरी के भीतर तय करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि 5 फरवरी को जब बेंच फिर इस मामले की सुनवाई करेगी तब सुप्रीम कोर्ट को बैठक के नतीजे की जानकारी दी जाए।



इससे पहले असम एनआरसी समन्वयक प्रतीक हजेला ने सुप्रीम कोर्ट में एक गुप्त दस्तावेज सौंपा। हजेला ने कोर्ट को बताया कि एनआरसी के पिछले प्रकाशन से बाहर हुए 40 लाख लोगों में कुल 36.2 लाख लोगों ने एनआरसी की अंतिम सूची में अपना नाम दाखिल करने के लिए दावा किया है। हजेला ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर तक ड्राफ्ट में शामिल नामों के खिलाफ 2 लाख से अधिक आपत्तियां दर्ज की गई हैं। उन्होंने यहा भी बताया कि दावों की सुनवाई से 15 दिन पहले सभी दावेदारों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसकी सुनवाई 15 फरवरी से शुरू की जाएगी।


सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में हुए एक सुनवाई में एनआरसी में नामों को शामिल करने पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख को 15 दिसंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर,2018 कर दिया था।1951 के बाद पहली बार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही एनआरसी के प्रकाशन में लोगों के नाम शामिल किए जाने की प्रक्रीया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चलने वाले एनआरसी के पहला मसौदा 31 दिसंबर, 2017  और 1 जनवरी, 2018 की रात में 1.9 करोड़ नामों के साथ जारी किया गया था।


एनआरसी प्रक्रिया की अंतिम सूची पिछले साल 30 जुलाई को जारी की गई थी, जिसमें कुल  3.29 करोड़ में से 2.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल थे। 2005 में शुरू हुई यह परियोजना भाजपा के शासनकाल में पूरा किया जा रहा है।