सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा के इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा एक अतिरिक्त मौके की मांग को खारिज कर दिया। सिविल सेवा के इच्छुक अभ्यर्थियों ने 2020 में अपने सभी उपलब्ध प्रयासों को समाप्त कर दिया था। उम्मीदवारों ने ऊपरी आयु सीमा में छूट की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि वे कोविड-19 महामारी के कारण हुए व्यवधानों के कारण UPSC CSE प्रीलिम्स 2020 के लिए उपस्थित नहीं हो पाए।


यही कारण है कि उम्मीदवारों ने UPSC सिविल सेवा 2020 के लिए एक अतिरिक्त प्रयास की मांग की है और कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर, इंदु मल्होत्रा और अजय रस्तोगी शामिल हैं। मामले की सुनवाई करने वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने केवल 'खारिज' शब्द ही बोला और फैसले को आगे बढ़ाया ही नहीं।


ध्यान दें कि सिविल सेवा आकांक्षी यूपीएससी परीक्षा में अधिकतम 6 बार उपस्थित हो सकते हैं और उनकी आयु सीमा 32 वर्ष है । ओबीसी उम्मीदवारों के पास 35 वर्ष की आयु तक नौ प्रयास हैं जबकि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 37 वर्ष की आयु तक ही है।