सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठा कोटा पर एक अहम फैसला लेते हुए मराठा आरक्षण को खत्म कर दिया है। मराठा रिर्जवेंशन को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि मराठा कोटा 50% से अधिक नहीं हो सकता है। कोर्ट ने बताया कि यह आरक्षण समानता का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  '' हमें इंदिरा साहनी के फैसले पर दोबारा विचार करने की कोई वजह नहीं मिली है ''।

बता दें कि कोर्ट जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता में जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और एस जस्टिस रवींद्र भट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मराठा आरक्षण के मामले पर फैसला सुनाया है। कोर्ट के मुताबिक मराठा समुदाय शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के नही है। इसलिए उन्हें आरक्षण नही दिया जा सकता है।

कोर्ट ने बताया है कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है और महाराष्ट्र ने आरक्षण की यह सीमा पार कर दी थी। आरक्षण रद्द करने के बाद अब मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। आरक्षण सिर्फ पिछड़े वर्ग को दिया जा सकता है। मराठा पिछड़े वर्ग की कैटेगरी में नही आते है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जस्टिस गायकवाड़ कमिशन और हाई कोर्ट दोनो ने असाधारण स्थिति में आरक्षण दिए जाने की बात की है लेकिन दोनो ने नही बताया की मराठा आरक्षण में असाधारण स्थिति क्या है।