सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो करेंसी यानी बिट क्वाइन जैसी मुद्राओं पर आरबीआई की ओर से लगाए गए पूर्ण बैन को रद्द कर दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अप्रैल, 2018 में इनकी ट्रेडिंग पर बैन लगाया था। आरबीआई की ओर से इसके लिए जारी किए गए सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आज इसे रद्द कर दिया। इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग मान्य होगी।


इससे पहले आरबीआई की ओर से कहा गया था कि उसने क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। केंद्रीय बैंक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किये गए एक हलफनामे में कहा गया था कि उसने केवल अपने नियमन के अंतर्गत आने वाले बैंकों और अन्य इकाइयों को इसके जोखिमों से बचाने के लिए यह कदम उठाया है।


यह है क्रिप्टोकरेंसी
गौरतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी है, जो ब्लॉक चेन तकनीक पर आधारित है। इस करेंसी में कूटलेखन तकनीक का प्रयोग होता है। इस तकनीक के जरिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है। क्रिप्टोकरेंसी का परिचालन केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है जो इसकी सबसे बड़ी खामी है।


आरबीआई ने दिया यह तर्क
आरबीआई के सर्कुलर को चुनौती देने के लिए इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आईएएमएआई की ओर से कहा गया कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से क्रिप्टोकरेंसी में होने वाली वैध कारोबारी गतिविधियों पर प्रभावी रूप से पाबंदी लग गई है। जिसके जवाब में आरबीआई ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। आरबीआई का कहना है कि उसने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मनी लाउंड्रिंग और आतंकी वित्त पोषण के खतरे के मद्देनजर यह कदम उठाया है।