बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट और केंद्र सरकार के बीच गुरुवार को एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गयी। जब असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जमकर लताड़ा।

इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कोर्ट सरकार की शक्तियों में ज्यूडिशियल ओवररीच यानी सीमा से बहुत ज्यादा दखल दे रही है। इस पर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम देश को घुसपैठियों से बचाने के बारे में पूछ रहे हैं। सरकार खुद तो काम करती नहीं है। हम करने के लिए कहते हैं तो ज्यूडिशियल ओवररीच बता रहे हैं। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।


एडिशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि हर साल 26 किमी एरिया में फेंसिंग कर रहे हैं। अगली तारीख पर इसका रोडमैप पेश कर देंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह बाॅर्डर 381 किमी लंबा है। आप सालाना सिर्फ 26 किमी फेंसिंग की बात कर रहो हो। क्या देश का भाग्य आपके शानदार शासन के भरोसे छोड़ दें?


इसके साथ ही एनआरसी के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गोगोई की बेंच ने असम में चल रहे नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) कार्यक्रम का ब्यौरा मांगा। इसी दौरान अटॉर्नी जनरल ने एनआरसी की डेडलाइन 31 दिसंबर से बढ़ाकर अगले साल जुलाई तक करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 2500 लोग इस काम में लगे हैं। अभी 1.14 करोड़ लोगों का वेरिफिकेशन बाकी है। लेकिन जस्टिस गोगोई ने डेडलाइन बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार अपने काम का ड्राफ्ट बनाकर पेश करे।

इस पर अटाॅर्नी जनरल ने कहा कि सरकार के काम की समयसीमा तय करना उसकी शक्तियों में ज्यूडिशियल ओवररीच है। इस पर जस्टिस गोगोई ने कहा कि संविधान ने विधायिका और न्यायपालिका की शक्तियों को मान्यता दी है। हमें समयसीमा तय करने का अधिकार है। इसके बाद अटॉर्नी जनरल कोर्ट रूम से चले गए।